मौसम में हो रहे लगातार उलटफेर के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है मौसम में हो रहे लगातार बदलाव से फसलों पर बुरा असर हो रहा है कभी तेज ठंड पड़ने लगती है तो कभी कोहरा छाने लगता है तो कभी बारिश के कारण मौसम में अलग ही मिजाज देखने को मिलते हैं इस वजह से फसलों पर अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है। जहां किसानों को कोहरे के कारण डर सता रहा है कि पाला न पड़ जाए और फसलों को नुकसान ना हो। वही बारिश से किसानों को खुशी का अनुभव हो रहा है क्योंकि यह गेहूं और चने की फसल के लिए अमृत सिद्ध होती है।
पिछले महा दिसंबर में गेहूं और चना सहित मशहूर व अन्य फसलों की बढ़वार के लिए जी तापमान की जरूरत थी वह नहीं रहा। कभी तापमान में तेजी देखी गई तो कभी तापमान तेजी से लुढ़कता देखा गया तापमान में स्थिरता नहीं देखने के कारण फसलों को नुकसान हुआ है तो कहीं तापमान बढ़ जाने से फसलों में कीड़े होने की समस्या पैदा हो गई।
ठंड कम पढ़ने से फसलों की ग्रोथ पर हुआ बुरा असर:-
पिछले महीने दिसंबर में गेहूं और चने की फसल सहित मशहूर व अन्य फसलों की बढ़वार के लिए जी तापमान की जरूरत थी वह नहीं मिल सका न्यूनतम तापमान 7 डिग्री से 10 डिग्री की जगह 11 से 13.5 डिग्री सेल्सियस तक रिकॉर्ड किया गया जबकि इन फसलों को कम तापमान की जरूरत होती है जिससे पौधों की जिस तरह से बघवार होना चाहिए था वह नहीं हो सकी कम तापमान से पौधों में जो शाखाएं निकलना था वह भी उसे मात्रा में नहीं निकल पाई हैं। बेशक इस वजह से फसलों के प्रोडक्शन में कमी आएगी।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर माह में तापमान में कमी न होने की वजह से फसलों के प्रोडक्शन में कमी आएगी और अब किसानों को जनवरी से थोड़ी उम्मीद है ताकि फसलों का प्रोडक्शन अच्छा हो जिस तरह का फसलों को जनवरी के महीने में मौसम की जरूरत है वैसा मौसम जनवरी में मिल सके ताकि फसलों की बढ़वार हो सके और फसल के प्रोडक्शन में और ज्यादा कमी ना आए।

बेमौसम होने वाली बरसात(मावठ) का फसलों पर होगा अच्छा असर:-
दिसंबर के महीने में फसलों को अनुकूल मौसम नहीं मिल सका जिससे कि उनमें बघवार नहीं हो सकी अब किसानों को जनवरी महीने से कुछ उम्मीदें हैं अब जनवरी में शुरुआत तो बारिश से हुई है साथ ही कोहरा भी रहा लेकिन इस बारिश से फसलों को फायदा मिल सकता है इसीलिए किसान खुश है जनवरी में बारिश से इस पर असर फसलों के उत्पादन पर दिखाई देगा यदि अभी 48 घंटे तक और बारिश होती है तो 1 से 2 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार बढ़ने की उम्मीद है।
कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञ ने बताया कि रवि फसलों पर बदले मौसम का प्रभाव उत्पादन पर असर को बढ़ता ही है उनके अनुसार मावठ की बारिश अब फसलों के लिए अमृत समान है इससे उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो इस समय गेहूं और चना फसल को पानी की जरूरत थी जो बारिश हुई है वह काफी कम है यदि और बारिश होती है तो फसलों को फायदा ही फायदा है इससे चना और गेहूं के उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा इस बारिश से कम से कम 5 से 10 फिसदी तक उत्पादन में फायदा हो सकता है और बढ़ोतरी होगी।
फसलों के सही से न बढ़ने का क्या रहा कारण:-
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले महीने दिसंबर में एक या दो दोनों को छोड़कर बाकी दिन न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस से अधिक ही रहा है जिसका सीधा असर पौधों की बढ़ोतरी पर पड़ता है तापमान अधिक होने से पौधों की शाखाएं काम बंद पाई है और उन्हें बढ़ोतरी के लिए जितने तापमान की जरूरत थी वह नहीं मिल सका है दिसंबर में अच्छी ठंड नहीं पड़ने से ऐसा देखने को मिल रहा है।
इसी तरह तापमान अधिक होने से समय से पहले फूल आने की संभावना बन गई जो सीधे उत्पादन को प्रभावित करती है चना फसल की बात की जाए तो अभी प्रति एकड़ 3 क्विंटल उत्पादन होने का अनुमान जताया जा रहा है अगर अब मौसम में उलट फिर होता है यानी बारिश होती है तो इसका सीधा असर प्रोडक्शन पर पड़ेगा और अच्छी फसल होने की संभावना है।
