सार :

मौसम की जानकारी में आज हम देश के सभी हिस्सों के मौसम की बात करेंगे , साथ ही कैसा रहेगा आने वाले दिनों में देश के सभी हिस्सों का मौसम। राजधानी में शुक्रवार को सीज़न की सबसे ज्यादा गर्मी रही। लेकिन अब मौसम विभाग ने यहां मौसम में जल्द ही बदलाव की आशंका जताई है। आज से दिल्ली के मौसम में बदलाव देखा जाएगा और दिल्ली समेत देश के इन राज्यों में 15 से 16 अप्रैल तक जमकर बरसेंगे बादल।

विस्तार :

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 13 से 15 अप्रैल के बीच उत्तर भारत के राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बारिश होने के आसार हैं। इसके अलावा 12 से 15 अप्रैल के बीच देश के पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है, जिससे इन राज्यों का मौसम सुहावना हो जाएगा। मौसम पूर्वानुमान जताते हुए बताया कि अगले 24 घंटों में दक्षिणी ओडिशा, पूर्वी असम और अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक या दो स्थानों पर भारी बारिश संभव है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 12 अप्रैल तक देश की राजधानी में आसमान साफ रहने की संभावना जताई गई थी लेकिन आज 13 अप्रैल को गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

अप्रैल के दूसरे हफ़्ते की शुरुआत में भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव देखने को मिलेगा 2 या तीन दिन बाद तापमान 41 डिग्री तक पहुँच सकता है। तो अप्रैल के तीसरे हफ़्ते में दिन का तापमान 42 डिग्री और उसके ऊपर भी पहुँच सकता है एक या दो दिन लू चलने की संभावना भी है तेज हवाएँ यह एक दो दिन आँधी भी चल सकती है और वहीं अप्रैल के चौथे हफ़्ते में नर तापमान बढ़ने का ट्रेंड पहले दिन से ही शुरू हो सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 13 से 15 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बारिश होने के आसार हैं।

राजधानी दिल्ली के मौसम का पूर्वानुमान :

बीते कुछ दिनों से दिल्ली में प्रचंड गर्मी पड़ने लगी। लेकिन अब मौसम विभाग ने यहां का मौसम बदलने और बारिश होने की संभावना जताई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 13 से 15 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बारिश होने के आसार हैं। इसके अलावा 11 से 12 अप्रैल के बीच देश के पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। दिल्ली में तेज गर्मी का दौर शुरू चुका है। इस समय दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है, जिसकी वजह से दिन में चिलचिलाती हुई गर्मी पड़ रही है, हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि 13 से 15 अप्रैल के बीच देश की राजधानी के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसके चलते तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।

13 से 14 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में छिटपुट गरज, बिजली और तेज़ हवाएँ चलने की संभावना है। शुक्रवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रहा, हालांकि एनसीआर में सबसे ज्यादा गर्मी गुरुग्राम हिस्से में रही। इस बीच गर्मी से बेहाल हो रहे लोगों के लिए मौसम विभाग ने जल्द ही दिल्ली के मौसम बदलने की खुशखबरी दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि शुक्रवार दिन में हल्के बादलों की आवाजाही रही है। खासकर शनिवार, रविवार और सोमवार को लगातार 3 दिन दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में तेज हवाएं चलने के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

मध्य भारत के इन राज्यों में बारिश का है अलर्ट :

मौसम विभाग ने आज दक्षिण-पूर्व राजस्थान समेत गुजरात के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां देखी जा सकती है। भारतीय मौसम विभाग ने मौसम पूर्वानुमान जताते हुए बताया कि अगले 24 घंटों में दक्षिणी ओडिशा, पूर्वी असम और अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक या दो स्थानों पर भारी बारिश संभव है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 13 से 15 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बारिश होने के आसार हैं। इसके अलावा 11 से 12 अप्रैल के बीच देश के पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है।

दक्षिण-पूर्व राजस्थान से लेकर मध्य महाराष्ट्र और दक्षिण कोंकण होते हुए तटीय कर्नाटक के उत्तरी हिस्सों तक औसत समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर एक ट्रफ/हवा का विच्छेदन बना हुआ है।इसके अलावा राजस्थान में 11 से 15 अप्रैल के बीच बारिश और तूफान संभव है। अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें संभव हैं। पूर्वोत्तर भारत में भी हल्की बारिश हो सकती है। वहीं उत्तरी तेलंगाना और केरल में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। अप्रैल के दूसरे हफ़्ते की शुरुआत में भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव देखने को मिलेगा 2 या तीन दिन बाद तापमान 41 डिग्री तक पहुँच सकता है। तो अप्रैल के तीसरे हफ़्ते में दिन का तापमान 42 डिग्री और उसके ऊपर भी पहुँच सकता है

अप्रैल माह में मौसम पूर्वानुमान :

पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में पाकिस्तान और पंजाब के आसपास के हिस्सों में औसत समुद्र तल से 3.1 किमी ऊपर स्थित है, मध्य और ऊपरी क्षोभमंडलीय पश्चिमी हवाओं में एक निम्न दबाव की रेखा बनी हुई है। देश के कुछ राज्यों में हीटवेव की स्थिति देखने को मिल रही है, तो वहीं, उत्तर पूर्वी भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां जारी हैं। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, 12 अप्रैल तक देश की राजधानी में आसमान साफ रहेगा। 13 अप्रैल को गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।अगर अप्रैल महीने के मौसम की बात करें तो पहले हफ़्ते में उत्तर भारत तक रहने वाले बेस्ट डिस्टर्बेंस के प्रभाव के कारण तापमान में उतार चढ़ाव होने की संभावना है।

1 , 2 दिन में तापमान 40 डिग्री के आस पास पहुँच सकता है। इस दौरान बादल छाए रहने और तेज हवाएँ चलने की संभावना है। वही अप्रैल के दूसरे हफ़्ते की शुरुआत में भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव देखने को मिलेगा 2 या तीन दिन बाद तापमान 41 डिग्री तक पहुँच सकता है। तो अप्रैल के तीसरे हफ़्ते में दिन का तापमान 42 डिग्री और उसके ऊपर भी पहुँच सकता है एक या दो दिन लू चलने की संभावना भी है तेज हवाएँ यह एक दो दिन आँधी भी चल सकती है और वहीं अप्रैल के चौथे हफ़्ते में नर तापमान बढ़ने का ट्रेंड पहले दिन से ही शुरू हो सकता है शुरुआती 2 तीन दिन लोग भी चल सकती है दिन का तापमान डिग्री और उससे भी ज़्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इस बार देश में मॉनसून जल्द आने की संभावना है। साथ ही भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। हालांकि, अब तक मौसम विज्ञान विभाग की तरफ से मॉनसून को लेकर पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है। लेकिन मौसम विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा सामान्य मॉनसून की बात कही थी। पंजाब में 13 से लेकर 15 तक बारिश की संभवाना जताई है। अधिकांश मौसम मॉडल भूमध्यरेखीय हिंद महासागर पर एक सकारात्मक चरण का सुझाव देते हैं जो प्रशांत क्षेत्र में ला नीना के गठन के साथ मेल खाता है। मौसम विभाग ने आज दक्षिण-पूर्व राजस्थान से लेकर मध्य महाराष्ट्र और दक्षिण कोंकण होते हुए तटीय कर्नाटक के उत्तरी हिस्सों तक औसत समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर एक ट्रफ/हवा का विच्छेदन बना हुआ है। मानसून की पृष्ठभूमि में इन घटनाओं का एक साथ अस्तित्व यह दर्शाता है कि ये कारक आमतौर पर जुलाई से सितंबर तक अनुभव की जाने वाली चरम मानसून स्थितियों को बढ़ा सकते हैं।

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