सार :
राजनीति में हमेशा ही उलट पर देखा गया है नेताओं ने हमेशा अपनी पार्टियों बदली है वहीं कुछ शुक्रवार को देखा गया। दिल्ली की राजनीति में शुक्रवार को उस समय बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस बीच सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे युवाओं के एक वर्ग और आम आदमी पार्टी समर्थकों की नाराजगी मानी जा रही है। आइए जानते हैं पूरी खबर विस्तार में।
विस्तार :
आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है। इसका ऐलान पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार शाम को 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। इसके बाद वह भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राघव के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल को पार्टी की सदस्यता दिलाई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद थे। अशोक मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चेयरमैन हैं और जालंधर में उनके घर 10 दिन पहले (15 अप्रैल) को ED ने छापेमारी की थी।बाकी चार सांसद अभी सामने नहीं आए हैं। स्वाति मालीवाल ने पोस्ट करके कहा- मैं इटानगर में हूं। शाम को दिल्ली लौटकर बात करूंगी। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं।
राघव ने बताया कि पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने यह फैसला लिया। इसलिए दलबदल कानून लगने का कोई मतलब नहीं है।राघव चड्ढा ने कहा पिछले कुछ सालों से, मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं। हमने यह फैसला किया है कि हम संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को BJP में मिला लेंगे। 21 मार्च 2024 को लोकसभा चुनाव से पहले जब शराब घोटाले में केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया। तब राघव ने न कुछ बोला, न सोशल मीडिया पर कुछ लिखा।फरवरी-2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, तो AAP को करारी हार मिली। पार्टी को सिर्फ 22 सीटें मिलीं जबकि BJP ने 48 सीटें जीतकर सरकार बनाई। तब भी राघव चुप्पी साधे रहे। AAP के किसी कार्यक्रम में नहीं दिखे।2025 की शुरुआत में ही राघव के सोशल मीडिया अकाउंट से AAP का बैनर और चुनाव निशान हटने लगे। AAP के अंदर चर्चा होने लगी कि राघव पार्टी के बजाय पर्सनल ब्रांडिंग पर फोकस कर रहे हैं। वह न पार्टी दफ्तर आते हैं, न किसी नेता से मिलते हैं। इस तरह राघव कई बार यह पार्टी छोड़ने का संकेत दे चुके हैं।
किस कारण राघव बीजेपी में हुए शामिल :

राघव चड्ढा ने 6 सांसदों के साथ ही आम आदमी पार्टी क्यों छोड़ी? ऐसा उन्होंने दल बदल विरोधी कानून से बचने के लिए किया। इस कानून के तहत सदस्यता बचाने का एकमात्र तरीका ये है कि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई चुने हुए सदस्य एक साथ टूटें और किसी दूसरी पार्टी में विलय कर लें। राघव चड्ढा के साथ AAP के 7 सांसदों ने बीजेपी जॉइन करके अपनी सदस्यता जाने के खतरे को टालने की कोशिश की है। देखें वीडियो। क्या यह कारण सटीक है? इससे पहले दिल्ली में भी आप के कई नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। इन्हीं में से एक कपिल मिश्रा हैं, जो कभी केजरीवाल सरकार में मंत्री हुआ करते थे और अब दिल्ली में बीजेपी की सरकार में मंत्री हैं, लेकिन राज्यसभा सांसदों का पार्टी छोड़ना कुछ मायनों में काफ़ी अलग है क्योंकि ये आम लोगों के वोट से चुनकर नहीं आते हैं। ऐसे में इन सांसदों से बीजेपी को क्या कोई फ़ायदा हो सकता है। आगे हम कुछ एक्सपर्ट्स से बातचीत के आधार पर इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
शुक्रवार को संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर राघव चड्ढा ने कहा, “हमने तय किया है कि हम, राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य संविधान के प्रावधानों के अनुसार बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। “आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ताज़ा घटनाक्रम को लेकर एक्स पर राघव चड्ढा का नाम लिए बिना सिर्फ़ इतना लिखा, “बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का।”
क्या बोले राघव आम आदमी पार्टी के बारे में :

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 15 साल तक पार्टी से जुड़े रहने के बाद शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया है कि उनके साथ 6 अन्य राज्यसभा सांसद भी AAP छोड़कर भाजपा का दामन थाम चुके हैं। चड्ढा का यह कदम पार्टी के भीतर चल रहे तनाव के बीच उठाया गया है। कुछ हफ्ते पहले ही उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि मित्तल भी अब चड्ढा के साथ भाजपा में चले गए हैं। चड्ढा का आरोप था कि पार्टी में उनकी आवाज को दबाया जा रहा था।
मालीवाल ने ‘X’ पर लिखा कि जिन सिद्धांतों और मूल्यों के साथ उन्होंने यह सफर शुरू किया था, उसे अरविंद केजरीवाल और पूरी AAP ने त्याग दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास पर अपने साथ हुई कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया और कहा कि आरोपियों को बचाया गया। उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार और महिलाओं के उत्पीड़न को भी अपने इस्तीफे का कारण बताया। यह ध्यान देने योग्य है कि 2023 में भी राघव चड्ढा एक बड़े विवाद में घिरे थे। उन पर दिल्ली सर्विस बिल से जुड़ी एक प्रस्तावित चयन समिति में 5 राज्यसभा सांसदों के ‘फर्जी हस्ताक्षर’ उनकी सहमति के बिना शामिल करने का आरोप लगा था। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने इसकी जांच के आदेश दिए थे और मामला विशेषाधिकार समिति तक पहुंचा था, जिसके कारण चड्ढा को कई महीनों के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया था।
