सार :

देश में अलग-अलग भौगोलिक स्थितियों के चलते अलग-अलग मौसम देखने को मिल रहेहैं। पहाड़ी राज्यों में जहां बारिश बर्फबारी और मौसम सुहावना बना हुआ है तो वही मैदानी राज्यों में भीषण गर्मी से लोगों का बुरा है तो वही बंगाल की खाड़ी में उठ रहा तूफान अब देशके तट वर्ती राज्योंको प्रभावित करने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है। इन राज्यों में इसका असर भी साफ देखा जाने लगा है कहीं आर्टिफिशियल रेन कराई जा रही है तो कहीं प्राकृतिक बारिश होने से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है आईए जानते हैं पूरी खबर विस्तार में।

विस्तार :

देश में जहां गर्मी से लोगों का बुरा हाल है तो दक्षिण भारत में बंगाल की खाड़ी की तरफ से बढ़ रहे चक्रवर्ती तूफान की वजह से तनाव बढ़ता जा रहा है। देश में अलग-अलग तरह के मौसम देखने को मिल रहे हैं पहाड़ी राज्यों में बारिश के चलते मौसम सुहावना बना हुआ है।तो वहीं मैदानी राज्यों में भीषण गर्मी की मार झेलनी पड़ रही है और मैदानी राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया जा चुका है। भीषण गर्मी ने देश के आधे से ज्यादा हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। तापमान इतना ज्यादा है कि दिन के समय लोगों का घरों से बाहर निकालना दुश्वार हो गया है। सार्वजनिक स्थल, हाट बाजार सभी दिन के समय सूने पड़े दिखाई दे रहे है। लोग जरूरत का सामान लेने भी दोपहर में जाना जरूरी नहीं समझते। शाम के समय घरों से निकलते हैं जब तापमान में थोड़ी नरमी आ जाती है। वही गर्मी की वजह से पानी का संकट भी सामने आ चुका है कई जगह पीने का पानी भी नसीब नहीं हो रहा है, तो वही राजस्थान में तापमान इतना ज्यादा बढ़ गया है कि नगर निगम और नगर पालिका द्वारा आर्टिफिशियल रेन कराई जा रही है। बता दें कि राजस्थान के जयपुर समेत कई जिलों में तापमान 48 डिग्री तक पहुंच चुका है जो रिकॉर्ड तोड़ है और झुलसा देनेवाला है इतनी ज्यादा तापमान में लोगोंको घर से बाहर न निकलने की और सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है।

बता दे कि मई का महीना अपने अंतिम चरणों में पहुंच चुका है और जून में भारत में मानसून की एंट्री हो जाती है लेकिन इस बार मानसून के 1 से 2 दिन जल्दी आने की संभावना जताई गई थी, जो देखा भी जा रहा है। मानसून के 31 मई को केरल में दस्तक देने की संभावना है। यहां प्री मानसून की गतिविधियां देखी जाने लगी है और बारिश चालू है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न हुए निम्न दबाव के क्षेत्र की वजह से चक्रवात भारत के तटीय राज्यों में एंट्री ले चुका है। जिसकी वजह से बीते 2 दिनों से केरल में मध्यम से तेज बारिश की गतिविधियां देखी जा रही हैं। बता दे की भारत के तटवर्ती राज्य तमिलनाडु झारखंड पश्चिम बंगाल समेत कुछ और राज्यों में इस चक्रवात का असर दिखाई देगा और बारिश की गतिविधियां देखी जाएगी। मौसम विभाग ने रविवार को इस चक्रवात के अन्य राज्यों में एंट्री लेने की बात कही है।

बंगाल की खाड़ी में तूफान :

लक्षद्वीप द्वीप समूह और अरब सागर के दक्षिण-पूर्व हिस्से पर एक सघन चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इस प्रणाली के 22 मई को केरल के समुद्र तट के करीब टकराया जिससे यहां भारी बारिश की गतिविधियां देखी गई। एक दिन बाद मौसम प्रणाली के केरल के दक्षिण में और आसपास के समुद्र के पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना है। यह मौसम प्रणाली केरल और माहे के पास चक्कर काटती रहेगी, जिससे इन दोनों के क्षेत्रों के मौसम पर गहरा असर होगा। अगले 3-4 दिनों में केरल और लक्षद्वीप द्वीप समूह में बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। केरल में भारी बारिश देखी गई है, तो दूसरी ओर तटीय तमिलनाडु और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर भी एक और चक्रवाती परिसंचरण है। बंगाल की खाड़ी पर परिसंचरण कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल गया है और केरल तट पर हवा की धारा मजबूत करने के साथ साथ यहां भारी बारिश देखी गई है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से केरल के कई हिस्सों में अलग-अलग समय पर लगातार और भारी बारिश हो रही है। जो इस सप्ताह के आखिर तक जारी रह सकती है। इन दोनों प्रणालियों से जुड़ने वाली पूर्व-पश्चिम ट्रफ़ रेखा भी इस क्षेत्र में मौसम की गतिविधि को बढ़ा रही है। मौसम विभाग ने समुद्र में मछली पकड़ने गए मछुआरों को तट पर लौटने और 28 मई तक बंगाल की खाड़ी में न जाने की सलाह दी गई है।

इन राज्यों को करेगा प्रभावित :

प्री मॉनसून सीजन में बंगाल की खाड़ी में अक्सर तूफान आते रहते हैं। इस बार भी मौसम विभाग ने 26 मई को चक्रवाती तूफ़ान रिमल के आने की बात कही है लेकिन इस बार तूफान चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में तांडव मचा सकता है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 27 मई को भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल के कुछ ज़िलों में इस दौरान 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। इन ज़िलों में 25 मई यानी आज से ही 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलना शुरू हो जाएंगी और 26 मई को हवाओं की गति 80 से 100 किलोमीटर के बीच में होगी। ऐसे में व्यापक नुक़सान की आशंका जताई गई है। इसके अलावा कोलकाता, हावड़ा और झाड़ग्राम ज़िलों में मौसम विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया गया है। मछुआरों को समुद्र में जाने से मना कर दिया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक़, 27 तारीख़ को बांग्लादेश में लैंड फ़ॉल के बाद भी पश्चिम बंगाल में 27 तारीख़ तक भारी बारिश और तेज हवाएं चलेंगी।

क्या यह प्री मॉनसून की घटनाए :

मई का महीना चक्रवातों का महीना कहलाता है इस महीने मे महासागरों में कई चक्रवात पैदा होते हैं जिसके चलते देश के मौसम में आंधी तूफान जैसी स्थितियां पैदा होती है और बारिश की गतिविधियां देखी जाती है, इसे प्री मानसून भी कहा जाता है। वही बंगाल की खाड़ी में भी एक लो प्रेशर एरिया चक्रवर्ती परिसंचरण के रूप में बन रहा है। देश में अल नीनो प्रणाली कमजोर हो रही है और ला नीना स्थितियां सक्रिय हो रही हैं, जो इस साल अच्छे मॉनसून के लिए अनुकूल है। केरल में मानसून आने की सामान्य तिथि एक जून होती है। लेकिन भारतीय मौसम विभाग ने मॉनसून को लेकर बड़ी अपडेट दी थी, मौसम विभाग ने मानसून पूर्वानुमान को लेकर बताया कि तिथि में चार दिन कम या ज्यादा होने की संभावना है। भारतीय समुद्र में आमतौर पर प्री मॉनसून और मॉनसून के समय तूफान आते हैं। ये तूफान अरब सागर या बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनते हैं। इस साल प्री मॉनसून यानी अप्रैल महीने से जून के बीच जब तक भारत में मॉनसून मजबूत नहीं हो जाता तब तक तूफान आने के आसार कम थे, हालांकि मॉनसून में इस बार जमकर तूफान आने वाले हैं।

कैसा रहेगा अन्य राज्यों के मौसम का मिजाज :

मैदानी राज्यों में भीषण गर्मी की मार झेलनी पड़ रही है और मैदानी राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया जा चुका है। भीषण गर्मी ने देश के आधे से ज्यादा हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। तापमान इतना ज्यादा है कि दिन के समय लोगों का घरों से बाहर निकालना दुश्वार हो गया है। सार्वजनिक स्थल, हाट बाजार सभी दिन के समय सूने पड़े दिखाई दे रहे है। लोग जरूरत का सामान लेने भी दोपहर में जाना जरूरी नहीं समझते। भारतीय मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश,पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदर्भ के अलग-अलग स्थानों में 27 मई, 2024 को हीटवेव चलने की संभावना जताई है। देश के टॉप 10 सबसे गर्म शहरों में राजस्थान के छह और मध्य प्रदेश के शहर शामिल हैं। राजस्थान के बानमेर में पारा 48.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया तो वहीं मध्य प्रदेश के दतिया में कुछ दिनों पहले ही तापमान 47 के पार पहुंच गया था। अन्य शहरों में भी तापमान 47 डिग्री से ऊपर चल रहा है। इसके अलावा, 24 मई से नौतपा भी शुरू हो रहा है, जो प्रचंड गर्मी के नौ दिन होते हैं।

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