G20 समित 2023 की अध्यक्षता इस बार भारत ने की। इस बार G20 की थीम “वसुदेव कुटुंबकम” “one Earth one family one future” रखी गई थी। भारत के 60 स्थानो पर 200 से भी ज्यादा बैठकें आयोजित की गई। जहां विकास को वैश्विक एजेंडे में प्राथमिकता दी गई। वहीं इसके अंतिम चरणों की बैठक दिल्ली में 9 से 10 सितंबर को आयोजित की गई। जिसमें 20 सदस्य देश 9 अतिथि देश और 14 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के नेता और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख एक साथ जी 20 सम्मेलन में नई दिल्ली में आए।

विश्व के उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ाने के लिए इन तीन विशेष संकल्पों के साथ:

*एक पृथ्वी के रूप में हरित पहल को बढ़ावा देना।

*एक परिवार के रूप में समावेशी विकास को बढ़ावा देना।

*एक बेहतर भविष्य के लिए प्रौद्योगिकी को समन्वित करना।

दिल्ली में हुई g20 समिट ने दुनिया में भारत की भागीदारी के कई दरवाजे खोल दिए हैं। इस समिट में “इंडिया- मिडल ईस्ट- यूरोप इकोनामिक कॉरिडोर” बनाने की घोषणा की गई है। भारत ,यूएई, सऊदी अरब ,अमेरिका, फ्रांस ,जर्मनी, इटली और यूरोपीय यूनियन सहित कुल 8 देश के इस प्रोजेक्ट का फायदा इसराइल और जॉर्डन को भी मिलेगा।

एक खास बात बता दें कि भारत नहीं चाहता कि सऊदी और अमेरिका के बीच दूरियां बड़े और चीन को मिडल ईस्ट में घुसपैठ करने का ज्यादा मौका मिले क्योंकि चीन यही मौका तलाश रहा है। मुंबई से शुरू होने वाला यह नया कॉरिडोर चीन के बेल्ट और रोड इनीशिएटिव का विकल्प होगा। यह कॉरिडोर 6000 किलोमीटर लंबा होगा, इसमें 3500 किलोमीटर समुद्री मार्ग शामिल है।

कॉरिडोर के बनने के बाद भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने में करीब 40% तक का समय कम लगेगा और समय की बचत होगी। अभी भारत से किसी भी कार्गो को शिपिंग से जर्मनी पहुंचने में 36 दिन लगते हैं, इस रूट से 14 दिन की बचत होगी। यूरोप तक सीधी पहुंच से भारत के लिए आयात निर्यात आसान और सस्ता हो जाएगा।

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