संसद के दोनों सदनों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद देश की महिलाओं ने जगह-जगह पर अपने तरीके से खुशियां मनाई। महिला आरक्षण बिल यानि नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा के बाद देर रात राज्यसभा से भी पास हो गया। सुबह होते ही महिलाओं ने अलग-अलग जगह पर, कुछ महिलाएं प्रधानमंत्री के लिए गाना गाती नजर आई तो कुछ खुशी से झूमती नजर आई।

प्रधानमंत्री मोदी ने हर नारी का अभिनंदन किया और महिला सांसदों ने जश्न भी मनाया। दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में महिला कार्यकर्ताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी का अभिनंदन और धन्यवाद किया। इस मौके पर पीएम ने महिला कार्यकर्ताओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। महिला सांसदों ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने इस फैसले के लिए पीएम मोदी की तारीफ भी की।

संसद में महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कमर कस ली है। भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में ही इस कवायत को लेकर अहम कदम उठा सकती है। पार्टी ने संगठन की नीति निर्धारित इकाई में भी महिलाओं की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर ली है। पार्टी के वरिष्ठ नेता के मुताबिक संवैधानिक रूप से व्यवस्था भले आगे अगले आम चुनाव में लागू करना आवश्यक ना हो लेकिन पार्टी इस दिशा में निर्धारित निर्णायक कदम उठाने जा रही है।

दरअसल भाजपा के संसदीय बोर्ड केंद्रीय चुनाव समिति जैसी नीति निर्धारक इकाई में महिला भागीदारी नाम मात्र है। इसमें भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर चार सूत्रीय रणनीति तय की है। मौजूदा विधेयक पारित होने के बाद भी इसके अमल में करीब 10 साल लगे को लेकर पार्टी इस सरकार के महिलाओं के साथ छल करने के तौर पर पेश करेगी। दोनों ही बड़ी पार्टियों ने अपने-अपने तरीके से इस बिल का लाभ उठाने की तैयारी कर ली है।

इस बिल के पारित होने के बाद कई बड़ी हस्तियों के रिएक्शंस भी आए हैं। अभिनेत्री शबाना आजमी ने महिला आरक्षण बिल के पारित होने की सराहना की है, वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे भारत के लिए ऐतिहासिक दिन बताया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विधेयक पर खुशी जताई है, स्वामी रामदेव ने महिला आरक्षण बिल लाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।

आखिर क्या है महिला आरक्षण विधेयक: महिला आरक्षण बिल यानि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अनुसार सांसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। महिला आरक्षण के लिए पेश किया गया विधायक 128वा संविधान संशोधन विधेयक है।

विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा राज्यों की विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में एक तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसका मतलब यह हुआ कि लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटे महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभा में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित नहीं की गई हैं।

कोटा वाइस कैसे हुआ वितरण: लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित हैं। इन आरक्षित सीटों में से एक तिहाई सीटे अब महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएगी। इस समय लोकसभा में 131सीट एससी एसटी के लिए आरक्षित है। महिला आरक्षण विधेयक के कानून बन जाने के बाद इनमें से 43 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इन 43 सीटों को सदन में महिलाओं के लिए आरक्षित कुल सीटों के एक हिस्से के रूप में गिना जाएगा।

इसका मतलब यह हुआ कि महिलाओं के लिए आरक्षित 181 सीटों में से 138 ऐसी होंगी। जिन पर किसी भी जाति की महिला को उम्मीदवार बनाया जा सकेगा। यानी इन सीटों पर उम्मीदवार पुरुष नहीं हो सकते। यह गणना लोकसभा में सीटों की वर्तमान संख्या पर की गई है।

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