देश में यह मौसम त्यौहार का है हर राज्य में लोग अपने-अपने तरह से इस मौसम में होने आने वाले त्योहारों को मना रहे हैं मध्य भारत उत्तर प्रदेश बिहार आदि में लोग मकर संक्रांति का त्यौहार मना रहे हैं वही गुजरात में उत्तरायण असम में बिहू पंजाब में लोहड़ी दक्षिण भारत में पोंगल अलग-अलग नाम से भारत में इस समय लोग त्योहार मना रहे हैं।
सोमवार को शतभिषा नक्षत्र और रविवार योग में मकर संक्रांति पर्व मनाया गया यह पर्व मध्य प्रदेश सहित गुजरात में उत्तरायण के रूप में और उत्तर प्रदेश और बिहार में मकान संक्रांति के रूप में मनाया गया। दरअसल यह त्यौहार मनाने का मुख्य कारण यह है कि शुभ सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश कर जाते हैं जिससे कि खरमास की समाप्ति हो जाती है।
सोमवार सुबह भी 9:35 पर सूर्य की धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास भी समाप्त हो गया खरमास के समाप्त होते ही 17 जनवरी से शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह गृह प्रवेश नए वाहन भूमि की खरीदारी जरूर संस्कार आदि सभी शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। बता दें कि अब शादियों का सीजन भी शुरू हो चुका है या नहीं खरमास के समाप्त होते ही शुभ कार्य भी शुरू हो चुके हैं लेकिन सर्दी में कोई कमी नहीं आई है लोगों को कड़ाके की सर्दी में ही उत्तरायण का पर्व मनाना पड़ा।
नदियों के घाटों पर स्नान करते नजर आए हजारों लोग:-
मकर संक्रांति के पर्व से सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाते हैं और सोमवार को ही सूर्य ने उत्तर दिशा की ओर गमन करना शुरू कर दिया है ऐसे में मकर संक्रांति पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा स्नान करते नजर आए साथ ही नर्मदा के अलावा अन्य घाटों पर भी लोग मकर संक्रांति के पर्व पर स्नान करते नजर आए भूतनी और आंवली घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा स्नान के लिए पहुंचे वही बता दें कि आमला घाट पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी पहुंची और स्नान कर विधि विधान से पूजा अर्चना की।
मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही लोग भी ठंड से राहत का इंतजार करते हैं इसके चलते रिवाज है और और पुरानी मान्यताएं हैं की मकर संक्रांति के मौके पर पवित्र नदियों के घाटों पर स्नान करना चाहिए जिससे कि लोग अपने परिवार जनों के साथ और मित्रों के साथ पवित्र नदियों के घाटों के किनारे स्नान करते नजर आए। ऐसा माना जाता है कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से सूर्य उत्तर दिशा की ओर गमन करने लगते हैं और इस पर्व को इस कारण उत्तरायण कहते हैं। जिस की सर्दी में कमी आने लगती है और तापमान में बढ़ोतरी होने लगती है।
मकर संक्रांति और उत्तरायण का क्या होता है अर्थ:-
दरअजल मकर संक्रांति या उत्तरायण पर्व एक ही होता है। हिंदू धर्म में इस पर्व की बहुत ही मान्यता होती है इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसीलिए इसे मकर संक्रांति कहा जाता है और इस दिन खरमास की समाप्ति हो जाती है और शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। वही धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर होती है यानी सूर्य उत्तर दिशा की ओर गमन करने लगते हैं ऐसा कहा जाता है कि उत्तर दिशा में सूर्य के गण करने से सर्दी में कमी आने लगती है और मौसम में गर्माहट आना शुरू हो जाती है। इसीलिए लोग उत्तरायण का पर्व मनाते हैं।
अगर साल 2024 की बात करें तो विद्वानों का कहना है कि 16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि मैं प्रवेश के साथ ही घर मार्च शुरू हो गया था जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीनू में होते हैं ऐसे में बृहस्पति और सूर्य दोनों का शुभ प्रभाव कम हो जाता है और सूर्य की गति धीमी हो जाती है बृहस्पति का तेज कमजोर रहता है। लेकिन जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो उनका तेज फिर से तेज हो जाता है और शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं विद्वानों का मानना है कि इस साल मार्च तक विवाह की कुल शुभ 22 मुहूर्त हैं। बता दें कि इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी सोमवार को मनाया गया।
