सार :

मध्य भारत के बाद उत्तर भारत में भी बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया है लगातार दो दिन हुई बारिश ने लोगों को गरमी से राहत दिलाई, लेकिन जल्द ही मौसम के इस रूप में भी परिवर्तन आने वाला है। सभी राज्यों में धीरे धीरे गर्मी में इजाफा होगा। कुछ दिनों तक गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। फिर नए पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिलेगा। आईए जाने पूरी ख़बर !

विस्तार :

उत्तर भारत में दो-तीन दिनों से लगातार हो रही हल्की बारिश के बाद चल रही ठंडी हवाओं ने मौसम खुशनुमा कर दिया है। इसमें बाद तापमान लगभग 7 से 8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे आ गया है। सोमवार को यानी आज भी हल्की और कहीं कहीं तेज बारिश और तेज हवा चलने का अलर्ट जारी किया है, लेकिन जल्द ही मौसम के इस रूप में भी परिवर्तन आने वाला है। सभी राज्यों में धीरे धीरे गर्मी में इजाफा होगा। कुछ दिनों तक गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। फिर नए पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिलेगा। अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी हिमालय पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी के साथ कुछ भारी बारिश और बर्फबारी हो सकती है।

मध्य भारत में अभी बारिश की गतिविधियां देखने को कम मिल रही हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 14 से 15 अप्रैल को देश की राजधानी के मौसम में बदलाव देखने को मिलने वाला था जो कि देखा भी गया है। जिसके चलते आज से तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। 14 और 15 अप्रैल को घाटी में जम्मू कश्मीर और 15 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी संभव है। 14 से 15 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में हल्की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएँ चलने की संभावना है।

राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के मौसम की ताज़ा ख़बर:

मध्य भारत के बाद उत्तर भारत में भी बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया है। लगातार दो दिन हुई बारिश ने लोगों को गरमी से राहत दिलाई, और अब मौसम विभाग ने सोमवार को भी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में आंधी के साथ बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश की संभावना है। इस वजह से तापमान में कोई बढ़ोतरी नहीं होने की संभावना है और अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। इसके अलावा न्यूनतम तापमान 20 डिग्री रह सकता है। दिल्ली के साथ उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव देखने को मिलेगा, जिसके कारण 13 से 15 अप्रैल के बीच बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम और कहीं कहीं तेज बारिश हो सकती है।

14 से 15 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में हल्की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएँ चलने की संभावना है। 14 और 15 अप्रैल को घाटी में जम्मू कश्मीर और 15 अप्रैल को यानी आज हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी संभव है। बारिश के साथ ही तेज़ हवाओं के चलने का भी अलर्ट है मौसम विभाग के अनुसार लगभग 40 से 50 km प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं आंधी तूफान चलने की संभावना है। पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश और बर्फबारी होने से यहां का मौसम सुहावना बना हुआ है। जिससे यह पहाड़ी राज्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हजारों की संख्या में पर्यटक यहां परिवार के साथ सुहावने मौसम का लुफ़्त उठाने पहुंच रहे हैं।

मध्यभारत के मौसम की ताज़ा ख़बर :

इस पश्चिमी विक्षोभ का असर मध्य भारत के राज्यों में सबसे अधिक देखा गया और अब यह उत्तर भारत में अपना असर दिखा रहा है, लेकिन मध्य भारत में अभी भी इसका असर बना हुआ है। दिन भर अच्छी धूप निकलती है। गर्मी और उमस से लोगों का बुरा हाल है।तापमान लगभग 34 से 35 डिग्री के बीच और कहीं कहीं इससे भी ज्यादा बना हुआ है। शाम ढलते ही आसमान में बादल छा जाते हैं। इसके बाद कई हिस्सों में गरज चमक के बाद हल्की से मध्यम बारिश भी देखी जाती है। पिछले 5 दिन से मध्य भारत के कई राज्यों में ऐसा ही मौसम देखा जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जब तापमान ज्यादा होता है और वातावरण में नमी मौजूद रहती है तो गलत चमक वाले बादल बन जाते हैं इन्हें सीबी क्लाउड कहते हैं इन्हीं बादलों के कारण तेज बारिश होती है।

मौसम विभाग ने इसके पीछे का कारण बताया कि बंगाल की खाड़ी में प्रति चक्रवर्ती हवाएं चल रही थी दूसरी तरफ विंड डिस्ट्रीब्यूशन यानी हवा में अनियंत्रितता और ट्रक लाइन एक साथ बनी हुई थी इस कारण अप्रैल में लगातार बारिश देखी जा रही है। आगे आने वाले दिनों में यह और भी देखा जा सकता है। मौसम विभाग ने आज दक्षिण-पूर्व राजस्थान समेत गुजरात के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां देखी जा सकती है। भारतीय मौसम विभाग ने मौसम पूर्वानुमान जताते हुए बताया कि अगले 24 घंटों में दक्षिणी ओडिशा, पूर्वी असम और अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक या दो स्थानों पर भारी बारिश संभव है।

एक और नए पश्चिमी विक्षोभ के लिए हो जाएं तैयार :

हाल ही में पूरे देश में पश्चिमी विक्षोभों और प्रति चक्रवात का असर देखा जा रहा है। जिससे देश के हर हिस्से में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही है। अब मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने मौसम पूर्वानुमान जताते हुए एक और नए पश्चिमी विक्षोभ की आशंका जताई है। इसकी अभी स्पष्ट रूप से आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है लेकिन यह संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार अगले दो-तीन दिन तक मौसम साफ रहने की संभावना है, लेकिन उसके बाद 18 अप्रैल से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है जिसका असर मध्य भारत समेत देश के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा।

बता दें कि अभी इसका स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि यह पश्चिमी विक्षोभ कितना ज्यादा स्ट्रांग होगा यदि यह पहले के सिस्टम की तरह स्ट्रांग हुआ तो गरज चमक के साथ बूंदाबांदी की स्थिति बनी रहेगी। यदि आसपास के इलाकों में बूंदाबांदी या बारिश हुई और वातावरण में नमी बनी रही तो 23 अप्रैल और 24 अप्रैल को बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगे। साथ ही हवाओं की रफ्तार भी तेज हो सकती है। मॉडल बेस्ड फोरकास्ट के हिसाब से अभी स्थिति बिल्कुल साफ नहीं हुई है लेकिन आने वाले दिनों में मौसम विभाग के द्वारा इस नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस की पूरी जानकारी जल्द ही दे दी जाएगी।

क्या इस बार जल्दी होगा मॉनसून का आगमन? :

इस बार देश में मॉनसून जल्द आने की संभावना है। साथ ही भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। हालांकि, अब तक मौसम विज्ञान विभाग की तरफ से मॉनसून को लेकर पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है। लेकिन मौसम विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा सामान्य मॉनसून की बात कही थी। पंजाब में 13 से लेकर 15 तक बारिश की संभवाना जताई है। अधिकांश मौसम मॉडल भूमध्यरेखीय हिंद महासागर पर एक सकारात्मक चरण का सुझाव देते हैं जो प्रशांत क्षेत्र में ला नीना के गठन के साथ मेल खाता है। मौसम विभाग ने आज दक्षिण-पूर्व राजस्थान से लेकर मध्य महाराष्ट्र और दक्षिण कोंकण होते हुए तटीय कर्नाटक के उत्तरी हिस्सों तक औसत समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर एक ट्रफ/हवा का विच्छेदन बना हुआ है।

मानसून की पृष्ठभूमि में इन घटनाओं का एक साथ अस्तित्व यह दर्शाता है कि ये कारक आमतौर पर जुलाई से सितंबर तक अनुभव की जाने वाली चरम मानसून स्थितियों को बढ़ा सकते हैं।इस अवधि के दौरान, मानसून का निम्न स्तर, या अवसाद, पश्चिम-उत्तर-पश्चिमी भारत और उत्तरी अरब सागर की ओर एक विस्तारित और स्थिर प्रक्षेप पथ का अनुसरण करने की उम्मीद है। इससे इन क्षेत्रों में वर्षा में वृद्धि का पता चलता है, जो मुख्य रूप से मानसून के मौसम की ऊंचाई के दौरान मानसून के कम होने के कारण होता है।स्काईमेट को दक्षिण, पश्चिम और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में पर्याप्त अच्छी बारिश की उम्मीद है। इसके अनुसार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुख्य मानसून वर्षा आधारित क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा होगी। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के पूर्वी राज्यों में जुलाई और अगस्त के चरम मानसून महीनों के दौरान कम वर्षा होने का अनुमान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *