सार :
भारत का एक वायरल व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन कब एक पॉलीटिकल पार्टी का रूप ले लेगी किसी ने नहीं सोचा था। दरअसल इस पार्टी को तूल तब मिला जब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) द्वारा बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर ‘कॉकरोच’ से करने वाला एक बयान सामने आया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं का भारी समर्थन मिलने के बाद यह चर्चा में आया। आईए जानते हैं इस वायरल मीम आंदोलन के पीछे की पूरी कहानी विस्तार से।
विस्तार :
भारत के चीफ जस्टिस में जब अपने एक बयान में बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की तब कॉकरोच सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। यह एक मीम के रूप में उभरा और अब इसने एक आंदोलन का रूप ले लिया है और आंदोलन के बाद अब यह एक पार्टी का रूप लेता जा रहा है। इसके घोषणापत्र में पार्टी का सदस्य बनने के लिए अनोखी शर्तें रखी गई हैं; जैसे- बेरोजगार होना, आलसी होना, सोशल मीडिया पर लगातार 11 घंटे बिताना, और सिस्टम के खिलाफ प्रोफेशनल तरीके से शिकायत कर सकने की क्षमता होना। युवाओं (Gen Z) के बीच इस मीम आंदोलन को भारी समर्थन मिला और इसके इंस्टाग्राम पर कुछ ही दिनों में 16 मिलियन के आसपास फॉलोअर्स हो गए। इस लोकप्रियता के बीच, कानूनी और सरकारी आदेशों का हवाला देते हुए ‘X’ पर पार्टी के आधिकारिक अकाउंट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया था।
इस पॉपुलैरिटी के बाद काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत की मुश्किल भी बढ़ती नजर आ रही हैं। जहां उनको जनता का इतना सपोर्ट मिल रहा है वही उनका परिवार काफी चिंता में है। बता दे की वह अभिजीत भारत के बाहर रहते हैं, जिससे उनका परिवार चिंता में है की अभिजीत के साथ कुछ गलता न हो जाए और वह घर सही सलामत वापस लौट आए।
कौन है ये कॉकरोच जनता पार्टी और कब उभरी :
भारती की पॉलिटिक्स में अब एक असामान्य प्रतीक जुड़ता नज़र आ रहा है। जो है कॉकरोच; बता दें कि पिछले हफ्ते, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त की टिप्पणियों के बाद कॉकरोच शब्द अचानक सुर्खियों में आ गया। उन्होंने एक सुनवाई के दौरान देश के बेरोज़गार युवाओं, जो पत्रकारिता और एक्टिविज़्म की ओर बढ़ रहे हैं, की तुलना तिलचट्टों और परजीवियों से कर डाली, बाद में उन्होंने सफाई देते हुए स्पष्ट किया कि उनका इशारा विशेष रूप से ‘फर्जी और बेहूदा डिग्री’ वाले लोगों की ओर था, न कि व्यापक रूप से भारत के युवाओं की तरफ। लेकिन तब तक यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैल चुकी थी, जिससे गुस्सा, चुटकुले और एक ‘मज़ेदार राजनीतिक विचार’ के तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP ) जन्म ले चुकी थी। बता दें कि सीजेपी कोई औपचारिक राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि राजनीतिक व्यंग्य पर आधारित एक ऑनलाइन आंदोलन है।
लेकिन केवल पांच दिन में ही इंस्टाग्राम पर इसके 1.7 करोड़ से ज़्यादा फ़ॉलोअर हो चुके हैं। इसे अभिजीत दीपके ने बनाया, जो एक राजनीतिक संचार रणनीतिकार और बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। अभिजीत का कहना है कि यह विचार एक मज़ाक के तौर पर आया था। जानकारी के लिए बताना बेहतर होगा कि अभिजित पहले आम आदमी पार्टी (AAP) से भी जुड़े रह चुके हैं।
कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत का परिवार है चिंतित :

कॉकरोच जनता पार्टी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत के बयान का व्यंग करने वाले अभिजीत दिपके की बढ़ती पॉपुलैरिटी ने उनके परिवार को चिंता में डाल दिया है। उनके माता-पिता को डर है कि अभिजीत की राजनीतिक व्यंग्य कंटेंट की वजह से उन्हें कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अभिजीत का परिवार चाहता है कि अभिजीत सुरक्षित घर लौटें और राजनीति से दूर रहें। अभिजीत दिपके फिलहाल बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं और पहले आम आदमी पार्टी से भी जुड़े रह चुके हैं। ऐसे में उनके पेरेंट्स चाहते हैं कि वो सुरक्षित घर लौट आए। जब अभिजीत के पिता भगवान दिपके से पत्रकारों ने बता की तो उन्होंने कहा कि, ‘मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए डर लगना स्वाभाविक हैं और उन्हें डर है कि अभिजीत को किसी दिन कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता हैं।
बता दें कि अभिजीत के पेरेंट्स ने ये भी कहा कि परिवार को CJP के बारे में सबसे पहले एक पड़ोसी से पता चला था. बाद में सोशल मीडिया पर इसकी बढ़ती पॉपलैरिटी को देखकर वो और परेशान हो गए। अभिजीत दिपके ने लगभग एक हफ्ते पहले ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया था, जिसने बहुत कम समय में इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए हैं। एक बात गौर करने योग्य है कि इस पार्टी के जरिए भारतीय युवाओं का गुस्सा क्यों फूट रहा है। Genz क्यों इस पॉपुलैरिटी से इतना जुड़ रहे हैं।
