हर साल दिसंबर महीने में लाखों की संख्या में लोग क्रिसमस और नए साल की खुशियां मनाने पहाड़ों पर पहुंचते हैं। हर साल यहां पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जाती है और ऐसा ही इस साल भी वही हुआ लाखों की संख्या में लोग पहाड़ों पर बर्फबारी के बीच अपना नया साल सेलिब्रेट करने अपने प्रियजनों के साथ पहुंचे। ऐसा देश के सभी पहाड़ी राज्यों पर हुआ जम्मू कश्मीर उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश के सभी फेमस हिल स्टेशंस पर लोगों का ताता लगा रहा और होटलो में भी काफी भीड़ देखी गई।

बर्फबारी देखने पहुंचे पर्यटक:

इस बार दिसंबर मैं कई पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी देखी गई तो कहीं दिसंबर बीतने के बावजूद अधिकांश पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी नहीं हुई। ऐसे में पहाड़ों पर नए साल का जश्न मनाने पहुंचे पर्यटकों में मायूसी है। चमोली के औली, कर्णप्रयाग, देवाल, ग्लवादम, लोहाजंग, रुद्रप्रयाग के चोपता, उत्तरकाशी के हर्षिल, केदारकांठा, सांकरी, टिहरी के धनोल्टी, चौरंगी, गंगी और पौड़ी के लैंसडौन, खिर्सू में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे, जिससे सभी जगह रौनक और चहल-पहल है, सभी ठहरने की जगह भरी हुई है।

वहीं होटलों में भी नए साल के जश्न को लेकर खासे इंतजाम किए गए हैं। देर शाम को कैंप फायर और संगीत के साथ पर्यटक जमकर थिरकते रहे। स्थानीय होटल संचालक बताते है कि भले ही बर्फबारी नहीं हुई है, लेकिन पर्यटकों के मनोरंजन के लिए सभी जगह पर खासे इंतजाम किए गए हैं। चेयर लिफ्ट प्रबंधक ने बताया कि रविवार को 1500 से अधिक पर्यटकों ने चेयर लिफ्ट से औली का दीदार किया। बीते दस दिनों में 10 हजार से अधिक पर्यटक चेयर लिफ्ट का आनंद ले चुके हैं।

मसूरी में मनाया गया शानदार तरीके से नए साल का जश्न:

मसूरी में नए साल की पूर्व संध्या पर सैलानियों का जमावड़ा लग गया। नए साल का जश्न मनाने के लिए शहर के सभी पर्यटन स्थलों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों संख्या में पर्यटक अपने प्रिय जनों के साथ नए साल की खुशियां मनाने मसूरी पहुंचे। मालरोड दिनभर पर्यटकों से गुलजार रहा। यहां मस्ती और खरीदारी का दौर जारी रहा। इस बीच पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोग और दुकानदार हो या होटल के मालिक हो बड़े खुश नजर आ रहे हैं।

इस बीच होटल एसोसिएशन का दावा है कि शहर में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 30 फीसदी पर्यटक कम आए हैं। शहर के कई होटलों में लाइव म्यूजिक और डीजे साउंड सिस्टम लगाए गए हैं। जिस पर रातभर पर्यटक थिरकते रहे। होटल्स के मालिकों ने बताया कि पिछले वर्ष करीब 90 फीसदी होटल पैक रहे, लेकिन इस वर्ष 60 फीसदी के आसपास ही होटल फुल हुए। यानी इस बार पिछले साल के मुकाबले पर्यटक ऑन की संख्या में कमी आई है। इस बार पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटकों की संख्या के काम होने से यहां के बिजनेस पर भी असर पड़ता है।

कहीं बर्फबारी से बुरा हाल , तो कहीं बर्फ ना देख पाने से मायूस हुए पर्यटक:

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहाड़ों की चोटियां बर्फविहीन हो गई हैं। वहीं, घाटियों में बहने वाले गदेरे और झरने कड़ाके की ठंड से जम चुके हैं। पूरी नीती घाटी में जगह-जगह पहाड़ों से गिरने वाले झरने बर्फ में तब्दील हो गए हैं। रविवार को कुछ जगहों पर सुबह बादल छाने के बाद बर्फबारी की उम्मीद जागी थी, लेकिन शाम होते-होते मौसम दगा दे गया और पर्यटकों की उम्मीद खत्म हो गई। हालांकि होटल और रिजॉर्ट संचालकों ने पर्यटकों के मनोरंजन के सभी इंतजाम कर रखे हैं। इसके अलावा अगर हम जम्मू कश्मीर का रुख करें तो यहां पर लगातार हो रही बर्फबारी से यहां पर खड़के की ठंड पड़ रही है और आने वाले पर्यटक मजे से बर्फबारी का लुफ्त उठा रहे हैं

बदलते पर्यावरण का असर इस बार साफ दिख रहा है। नीती घाटी की जो चोटियां इन दिनों बर्फ से लकदक बनी रहती थीं, वह बर्फविहीन हो गई हैं। मौसम शुष्क होने से क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शाम होते ही यहां शीतलहर शुरू हो जाती है। जिससे यहां का तापमान माइनस 10 तक पहुंच रहा है। ऐसे में क्षेत्र में बहने वाले अधिकांश झरने व गदेरे पूरी तरह से बर्फ में तब्दील हो चुके हैं। सड़क पर बहने वाला पानी भी जगह-जगह पर जमा हुआ है। इस बार कई जगह पर्यटक की संख्या में कमी आई है और बर्फबारी भी कम हुई है जिससे कि पर्यटक बर्फबारी ना देखने से मायूस हुए।

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