22 जनवरी देश के लिए विश्व में एक गर्व का दिन रहा। इस दिन वर्षों से तिरपाल के नीचे बैठे श्री रामलला को भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कर विराजमान किया गया और श्री रामलला के बाल स्वरूप का प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान पूरा किया गया। जिसके बाद 23 जनवरी से देश की जनता और विश्व के लिए श्री रामलला के बाल स्वरूप दर्शन के लिए भक्तों के लिए द्वार खोल दिए गए।
श्री रामलला के भव्य स्वरूप के दर्शन करने के लिए जब पहली बार भगवान के मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खुले तब मंगलवार को लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ श्री रामलला के बाल स्वरूप के दर्शन करने को उमड़ पड़ी। भक्तों की संख्या इतनी ज्यादा थी की सुरक्षा बल भी उन्हें संभाल नहीं पा रहे थे श्री राम लाल के दर्शन के लिए तड़के 3:00 बजे से ही कटारे लगनी शुरू हो गई थी करीब 1 किलोमीटर लंबा और 100 फीट चौड़ा राजपथ भक्तों से खचाखच भर गया था।
पहले दिन लाखों भक्तों ने किए श्री रामलला के बाल स्वरूप के दर्शन:-
अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर हर दिन एक नया इतिहास रच रहा है। जब भक्तों के लिए 23 जनवरी से भगवान के मंदिर के द्वार खोले गए तब लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। पहले दिन फेस रिकॉग्निशन केमरों के मुताबिक पहले दिन 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन किए जो रिकॉर्ड बन गया। बता दे कि करीब 50,000 राम भक्त दर्शन के लिए सुबह 3:00 बजे से लंबी कतारों में लगे दिखाई दिए 6 डिग्री में कड़ाके की ठंड के बीच कई लोग तो मंदिर के आसपास ही कंबल ओढ़ कर सो गए थे ताकि सुबह जल्दी दर्शन हो जाए यहां से मंदिर महेश 600 मीटर है लेकिन यह दूरी तय करने में 3 से 5 घंटे तक का समय लग गया।
बता दें कि सुबह 3:00 बजे से देर रात तक भक्तों ने प्रभु श्री राम के बाल स्वरूप के दर्शन किए। दोपहर तक भक्तों की भारी भीड़ रही और दर्शन करने में 3 से 5 घंटे तक लग गए, लंबी कतारों के बीच भक्तों ने फिर भी श्री राम के दर्शन किए। बताया जा रहा है कि रात के समय यह भीड़ कम हो गई और दर्शन करने में काफी कम समय लगा। वहां उपस्थित भक्तों का कहना है कि रात के समय केवल 45 मिनट के अंदर ही प्रभु के दर्शन हो गए जबकि सुबह जहां 4 से 5 घंटे तक लग रहे थे।
श्री रामलला की नई मूर्ति का भी हुआ नामकरण:-
जहां प्रभु के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही थी वहीं इस बीच प्रभु के नए स्वरूप यानी बाल स्वरूप की नई मूर्ति का नामकरण भी हुआ। आचार्य अरुण दीक्षित ने बात के अनुसार रामलाल की नई मूर्ति का नामकरण हो गया है इन्हें “बालक राम” कहा जाएगा। जहां श्री राम के भक्त किसी मंदिर में एक दिन में सर्वाधिक भक्तों की संख्या का रिकॉर्ड बना रहे थे वहीं श्री राम के नई मूर्ति का नामकरण हो रहा था।
मोबाइल फोन समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक सामान हैं बैन :-
श्री रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश के लिए कड़े नियमों और सुरक्षा मानकों से गुजरना होगा। मंदिर की पूरी सुरक्षा का ध्यान रखा गया है जिसके लिए, मंदिर में हर तरह का इलेक्ट्रॉनिक सामान वर्जित किया गया है जैसे:- मोबाइल, कैमरा आदि। मंदिर में बाहर से प्रसाद लेकर जाना भी मान्य नहीं है। श्रद्धालुओं को आरती में शामिल होने के लिए जन्मभूमि तीर्थ से पास बनवाना होगा, यह निशुल्क होगा। इसके लिए आधार समेत कोई भी विद्या पहचान पत्र जरूरी है आरती की अनुमति अभी सिर्फ 30 लोगों को मिल सकती है।
रोज प्रभु की 6 बार होगी आरती:-
- पहले मंगला आरती : यह सुबह 4:30 बजे प्रभु रामलला को जगाने के लिए होगी।
- दूसरी श्रृंगार आरती : यह सुबह 6:30 से 7:00 बजे होगी इसमें यंत्र पूजा सेवा और बाल भोग शामिल होगा।
- तीसरी आरती राजभोग आरती : होगी यह दोपहर 11:30 बजे और शहद से पहले की आरती होगी इसके बाद रामलाल ढाई घंटे तक विश्राम करेंगे गर्भ ग्रह बंद हो जाएंगे हालांकि इस दौरान श्रद्धालु मंदिर परिसर में घूम सकते हैं।
- चौथी आरती : दोपहर 2:30 बजे यह आरती होगी इसमें अर्चक रामलाल को शयन से जगाया जाएगा।
- पांचवी आरती : शाम 6:30 बजे होगी
- छठवीं आरती शयन आरती : यह रात 8:30 से 9:00 बजे के बीच होगी इसके बाद रामलाल चयन करेंगे। श्रद्धालु केवल सुबह 6:30 बजे दोपहर 11:30 बजे और शाम 7:30 बजे की आरती में ही शामिल हो सकेंगे।
