ISRO New Mission:

भारत की स्पेस एजेंसी इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन) हर साल नए इतिहास रच रहा है। चंद्रयान, मंगलयान , सूर्ययान (आदित्य L1) के बाद अब भारत एक और इतिहास रचने जा रहा है। भारत की स्पेस एजेंसी ISRO, 17 फरवरी को एक और इतिहास रचने से कुछ ही कदम दूर है। भारत अब नए सेटेलाइट के जरिए सबसे ज्यादा सटीक मौसम की जानकारी ज्ञात कर पाएगा यह सबसे आधुनिक मौसम और डिजास्टर वार्निंग सैटेलाइट होगा।

सबसे आधुनिक मौसम सैटेलाइट जल्द होगा लॉन्च :

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा बनवाया गया INSAT- 3DS सेटेलाइट 17 फरवरी 2024 को लॉन्च किया जाएगा। इसकी लांचिंग GSLV – F14 रॉकेट से शाम 7:30 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से होगी। बता दें कि इसरो ने जानकारी दी है कि इस सैटेलाइट को जिओसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। रॉकेट की असेंबलिंग का काम शुरू हो चुका है सेटेलाइट को रॉकेट के आखिरी स्टेज यानी नोज में रख दिया गया है।

क्या काम करेगा INSAT 3DS :

बता दे की इसरो द्वारा लॉन्च किया जाने वाला नया मौसम सैटेलाइट सबसे ज्यादा आधुनिक बताया जा रहा है। इस सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य जमीन, समंदर ,मौसम और इमरजेंसी सिग्नल सिस्टम की जानकारी मुहैया कराना होगा। इसके अलावा यह राहत एवं बचाव कार्यों में भी मदद करेगा, साथ ही यह सैटेलाइट आपदा की सही और सटीक जानकारी भी लग पाएगा। इनसेट 3 सीरीज के सेटेलाइट में 6 अलग-अलग प्रकार के जियो स्टेशनरी सेटेलाइट्स हैं, यह सातवीं सैटेलाइट होगी।

INSAT-3DS स्वचालित डेटा संग्रह प्लेटफार्म और स्वचालित मौसम स्टेशनों से डाटा प्राप्त करता है जिससे मौसम के पूर्वानुमान करने की क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी। यह बीकन ट्रांसमीटरों से संकट संकेत और चेतावनी का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसरो के नए रॉकेट एसएसएलवी के अलावा वारहॉर्स पीएसएलवी को भी लॉन्च किए जाने की उम्मीद है जिसे एक उद्योग संघ ने विकसित किया है। इसरो ने कहा कि उपग्रह के निर्माण में भारतीय उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

इस नए उपग्रह के पेलोड में लगे हैं 6 चैनल इमेजर :

INSAT-3DS अभी तक के उपग्रह में से सबसे अलग बताया जा रहा है और सबसे ज्यादा आधुनिक बताया जा रहा है। अपने उन्नत पेलोड और संचार सुविधाओं के साथ आपदा चेतावनी को लेकर डाटा जारी कर पूर्व चेतावनी देने वाला यह उपग्रह मौसम की सटीक जानकारी देगा। इस उपग्रह के पेलोड जैसे 6 चैनल इमेजर ,19 चैनल साउंडर , डाटा रिले ट्रांसपोंडर और सैटेलाइट ऐडेड सर्च एंड रेस्क्यू ट्रांसपोंडर के माध्यम से हासिल किया जाएगा।

दरअसल इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य है कि यह पृथ्वी की सतह की निगरानी करेगा मौसम संबंधी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में जानकारी देगा और समुद्र का अवलोकन करेगा साथ ही उसके पर्यावरण को भी पूरा करेगा वायुमंडल के विभिन्न मौसम संबंधी मापदंडों का प्रोफाइल प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य डेटा संग्रह प्रदान करना डेटा संग्रह प्लेटफार्म से डाटा प्रसार क्षमताएं और सैटेलाइट सहायता प्राप्त करना खोज और बचाव सेवाएं प्रदान करना है।

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