मणिपुर हिंसा का लगातार 78 दिन हो गए हैं लेकिन यह हिंसा समाप्त होने का नाम नहीं ले रही। बता दें कि यह हिंसा एक सामुदायिक हिंसा है जिसमें मणिपुर के दो समुदाय कुकी और मैताई समुदाय आपस में वर्चस्व के लिए लड़ाई कर रहे हैं। इसके कारण मणिपुर का जनजीवन अस्त वस्त हो गया है और लगातार शर्मसार करने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में एक बहुत ही शर्मनाक घटना सामने आई है जिसमें हिंसा ग्रस्त मणिपुर में कुकी समुदाय की महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया।

बता दें कि पिछले ढाई महीने से यह हिंसा चल रही है। जिससे आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है कभी अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए पर्यटकों को आकर्षित करने वाला यह प्रदेश आज हिंसक झड़पों में गिरा हुआ है। दो समुदायों के बीच लड़ाई के चलते मणिपुर के 37 लाख लोग हिंसा में जीने को मजबूर हो गए हैं वहीं अभी तक 150 लोगों की जान जा चुकी है।

इस घटना से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा ,वीडियो देखने के बाद हम बहुत परेशान हैं महिलाओं को निशाना बनाने की मंजूरी नहीं दे सकते। महिलाओं का हिंसा के साधन के रूप में इस्तेमाल करना अस्वीकार्य है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि उन्होंने इस भयावह घटना के दोषियों पर कोई कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं की। साथ ही 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई से पहले गृह मंत्रालय और राज्य के मुख्य सचिव को हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं।

वहीं शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वीडियो परेशान करने वाला है अभी यह भी नहीं पता कि यह एक घटना थी या ऐसी घटनाओं का कोई पैटर्न चल रहा है महिलाओं को इस जगह साधन के रूप में इस्तेमाल करना अस्वीकार्य है। और सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने के मामले में स्वत संज्ञान लिया है। और राज्य और केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि कार्यवाही जल्द से जल्द करें अन्यथा सुप्रीम कोर्ट कोई निर्णय लेगा।

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