रूस ने अपनी स्पेस एजेंसी रोसकॉसमॉस से 11 अगस्त को “लूना 25” सोयूज 2.1बी रॉकेट से चांद पर भेजने के लिए लांज किया था। भारत की तरह रूस का भी यह चंद्रमा के साउथ पोल पर जाने का मिशन है। “लूना 25” चंद्रयान 3 से जल्दी तेजी से चांद पर जा रहा है। आज रशिया के वैज्ञानिकों ने इसका इंजन फिर से शुरू करके इसकी कक्षा को घटाया है। अतः अब लूना 25 चांद से केवल 100 किलोमीटर की दूरी पर चक्कर लगा रहा है। लूना 25 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर 21 अगस्त को लैंडिंग करेगा। यह वहां पर पानी की खोज करेगी। इसमें केवल लैंडर अकेला है, जबकि भारत का चंद्रयान-3 मिशन, 23 अगस्त को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करेगा, इसमें तीन भाग हैं लेंडर ,रोवर और प्रोपल्शन माड्यूल।

17 अगस्त को चंद्रयान-3 प्रोफेशन मॉड्यूल से अलग होगा और 23 अगस्त को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। लेंडर और रोवर के साथ। अगर बात करें रूस की तो रसिया ने पूरे 47 साल बाद चांद पर कोई मिशन भेजा है। इससे पहले रूस ने सन 1976 में “लूना 24” को चांद पर भेजा था। लूना 24 रशिया से चांद के इक्वेटर पर भेजा गया था और वह 170 ग्राम मून डस्ट को लेकर पृथ्वी पर पहुंचा था। यह एक सफल मिशन रहा था, लेकिन एक बात बता दें कि यह सभी मिशन चांद के इक्वेटर पर या उत्तरी ध्रुव पर ही हैं हुए हैं।
दक्षिणी ध्रुव पर आज तक कोई भी देश अपने मिशन सफल नहीं कर पाया है और अपने यान लैंड नहीं करवा पाया है लेकिन इस बार रसिया और भारत की कोशिश चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाने की है अब देखना यह होगा कि 21 और 23 अगस्त को मिशन सफल होते हैं।
