ओंकारेश्वर एकात्मधाम धार्मिक पर्यटन की नई राजधानी बनने जा रहा है। आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आचार्य शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची बहुधातु से निर्मित मूर्ति का अनावरण करने जा रहे हैं। अद्वैत लोक का शिलान्यास भी करेंगे। इसी के साथ आदि शंकराचार्य की दीक्षा स्थली एक बार फिर देश दुनिया को अद्वैत वेदांत यानी ब्रह्म और ब्रह्मांड का दर्शन बताएगी। इस आध्यात्मिक उत्सव में हजारों संतों के साथ सैकड़ो दिग्गजों का जमावड़ा भी हुआ है।

शिव की नगरी कही जाने वाली ओंकारेश्वर में शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची मूर्ति का मुख दक्षिण दिशा में यानी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और नर्मदा की ओर रखा गया है। जाने-माने शिल्पकार भगवान रामपुरी के मार्गदर्शन में बनी इस प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध चित्रकार वासुदेव कामत ने 12 साल के शंकराचार्य के बाल स्वरूप का चित्रण किया। आदि शंकराचार्य की बाल रूप प्रतिमा के रूप को उकारना बेहद ही चुनौती पूर्ण काम था, यह इसलिए था क्योंकि किसी ने भी शंकराचार्य जी का बाल रूप नहीं देखा था ना ही कोई पेंटिंग उपलब्ध है। इसे बनाने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने देश के 11 मूर्तिकारों का कांटेक्ट कराया। उनके बनाए चित्र और मूर्तियों को धर्माचार्य ने अपनी कसौटी पर जो उम्मीदवार शास्त्र और साधु के नजदीक पाए गए उन्हें स्टेप बाय स्टेप फाइनल किया गया।

वर्ष 2017 में साधु संतों के साथ ओंकारेश्वर में नर्मदा सेवा यात्रा कार्यक्रम हुआ था। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आचार्य शंकराचार्य की प्रतिमा के निर्माण का संकल्प लिया था। जो आज पूरा हो गया है इसी मूर्ति के अनावरण के लिए आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ओंकारेश्वर में मूर्ति का अनावरण करने जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर एक बार फिर उत्सव के लिए तैयार है। इस बार यह जमावड़ा निवेश या विदेशी मेहमानों की अवगत के लिए नहीं बल्कि आध्यात्मिक के चिंतन और साधु संतों के आगमन और सत्कार के लिए किया गया है। ओंकारेश्वर में आचार शंकराचार्य के प्रतिमा अनावरण में देश भर से आने वाले साधु संतों और पीठों के शंकराचार्य के लिए ओंकारेश्वर के नजदीक क्षेत्र के अलावा इंदौर की होटल में भी मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने जहां 3000 से अधिक कमरे बुक कराए हैं। वहीं ओंकारेश्वर के आसपास भी 300 कमरा बुक किए गए हैं। इसके लिए 7 दिन पहले से ही इंतजाम में महकमा जुट गए थे। मुख्य आयोजन वाले इन दो दिनों के लिए विभाग ने लगभग 343 वाहनों की व्यवस्था की है यह वहां अतिथियों के आने-जाने की व्यवस्था के लिए लगाए गए हैं इनमें से कुछ वहां अतिरिक्त रूप से इंदौर और खंडवा में रखें गए हैं आयोजन के लिए पूरा महकमा 7 दिन पहले से ही इंतजाम में जुट गया था।


मूर्ति के बारे में कुछ रोचक तथ्य:
आदि शंकराचार्य की मूर्ति कुछ इस तरह डिजाइन की गई है।
* 500 साल तक खराब नहीं होगी, नर्मदा घाट से यह 300 फीट ऊंची रखी गई है।
* 250 तन स्ट्रक्चरल स्टील का मूर्ति में इस्तेमाल किया गया है।
*101 फीट का है आदि शंकराचार्य का दंड।
*16 फीट ऊंचा कमल बनाने में 8500 क्यूबिक फीट पत्थर लगे हैं।
*100 टन ब्रोंज पैनल लगाए गए हैं प्रतिमा में।
*वही मटेरियल लगा जो स्टैचू ऑफ यूनिटी में यूज किया गया है।

