बादल फटने से उत्तर सिक्किम में तबाही आ गई है उत्तर सिक्किम की लोहनक झील पर बुधवार को बादल फटने से तीस्ता नदी के बेसिन में बाढ़ आ गई। जिससे की जबरदस्त तबाही हुई है। अब तक 10 लोगों की मौत और 60 अन्य लोगों के लापता होने की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि सिक्किम के उत्तरी क्षेत्र में 2 घंटे में 15 इंच तक बारिश हो चुकी थी जिससे कि बांध टूट गया और जल स्तर 20 फिट बढ़ गया।
सिक्किम के बारदांग में सेना के कैंप से 22 जवान लापता है सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि अचानक भारी मात्रा में जल भराव से चुंगथम बांध टूट गया। बांध के कैचमेंट एरिया में 20 फीट तक जलस्तर बढ़ गया एक लापता सैनिक मिल गया है मलबे में सेना के 41 वाहन भी दब गए हैं। 3 हज़ार पर्यटक भी फंसे हुए हैं। बिजली भी बंद है सैकड़ो गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट चुका है।

राज्य सरकार ने इस आपदा घोषित कर दिया है कुछ इलाकों में 2 घंटे में 15 इंच तक बारिश दर्ज की गई है सिक्किम को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 10 के कई हिस्से बाढ़ में बह गए हैं।
आखिर यहां बादल क्यों फटा विशेषज्ञों की माने तो जब तापमान बढ़ जाता है तब हवा में नमी को ज्यादा मात्रा में देर तक थामें रखने की क्षमता बढ़ती है। हवा में ज्यादा देर तक नमी रहने के कारण लंबे समय तक बारिश नहीं होती स्थिति बदलने पर जब हवा से एक साथ सारी नमी रिलीज होकर भारी बारिश के रूप में होती है तो यह बादल फटने की घटना का कारण बनती है। सिक्किम में भी ऐसा ही हुआ। बादल फटने की वजह ग्लोबल वार्मिंग हो सकती है। यह पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा होता है।

देश भर में बारिश की निगरानी का बेहतरीन तंत्र है लेकिन पहाड़ी इलाकों के लिए बहुत हाईएस्ट डेंसिटी और हाई रेजोल्यूशन मॉनिटरिंग सिस्टम होना चाहिए। अभी हमारे पास बादल फटने की घटनाओं की रिकॉर्डिंग करने के लिए उपयुक्त निगरानी सिस्टम नहीं है। बता दें कि सिक्किम की लोचन घाटी के ऊपरी क्षेत्र में लंबे समय से सेना की तैनाती रही है। बादल फटने वाले स्थान से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर चीन की सीमा है सामरिक रूप से यह इलाके इलाका काफी अहम है। 18000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई वाले इस स्थान पर अत्यधिक सर्दी और बर्फीले तूफान की आशंका रहती है।
