सार :
मानसून में बारिश का सीजन शुरू होते ही का कई तरह के इंफेक्शन और बीमारियां फैलने लगती हैं जिनमे फंगल इंफेक्शन और पाचन संबधी बीमारियां आम होती है। वैसे तो हर मौसम बदलने से मानव शरीर खुदको अनुकूल बनाने की कोशिश करता है और जो नहीं कर पाता उसे बीमारियों को झेलना पड़ता है। बारिश के मौसम शुरू होने पर ज्यादा अनुकूलता की आवश्यकता होती है, सबसे ज्यादा असर हमारे खान पान से होता है। आईए जानते हैं आखिर मानसून में इन समस्याओं से कैसे बचा जा सकता है।
विस्तार :
मानसून और बारिश का सीजन आते ही कई तरह के वाइरस और बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं और कई तरह की बीमारियां फैलाने लगते हैं। वातावरण में नमी होने से फंगल इंफेकशन की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। साथ ही मानव शरीर में पाचन को लेकर भी कई समस्या होने लगती है पाचन संबंधी बीमारियां बारिश के मौसम में ज्यादा देखी जाती हैं। बारिश के दौरान लीवर संक्रमण के मामले करीब 60% ज्यादा बढ़ जाते हैं। जिससे लवर से जुड़ी समस्याएं जैसे पीलिया लिवर इन्फेक्शन या हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। इनके अलावा कई रेगुलर समस्याएं जैसे खाना सही से नहीं पचना, गैस बनना, एसिडिटी आदि होने लगती है और यह आम सी बात है। मानसून के दौरान उमस भरा मौसम आपके पूरे पाचन तंत्र को सुस्त बना देता है। ऐसे में इस मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यदि थोड़ी-सी सावधानी और सजगता बरतें तो आप कई घातक बीमारियों से दूर रह सकते हैं। हमारे पाचन तंत्र को नींद पूरी होना न होना बहुत अधिक प्रभावित करती है इस मौसम में नमी होने की वजह से और बेवक्त उमस बढ़ जाने से सोने का सिस्टम भी बिगड़ जाता है और समय पर टाइम टेबल से भोजन करना भी छूट जाता है जिससे पाचन संबंधी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। आईए जानते हैं बारिश के मौसम में पाचन संबंधी परेशानियां आखिर किन कारणों से होती हैं?
कारण जानना जरूरी क्यों होती हैं बारिश में पाचन संबंधी परेशानियां?

बारिश के मौसम में पाचन संबंधी कई बीमारीयां पैदा हो जाती हैं। मानसून का मौसम चिलचिलाती गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है, खास तौर पर हमारे पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं पैदा कर देता है। जलजनित रोग , तथा जलभराव के कारण होने वाले विशिष्ट संक्रमण आदि। वातावरण में नमी बढ़ जाने से सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना भी बढ़ जाती है। इस मौसम में हर चीज बहुत जल्दी संक्रमित होती है इसीलिए हमें उपयोग करने से पहले खाना पानी या अन्य उपयोग करने वाली सामग्री को ध्यानपूर्वक इस्तेमाल करना चाहिए। मानसून में पाचन संबधी बीमारियां पैदा होने हम कारण संक्रमित पानी और खाना होता है।
दूषित पानी है पाचन संबंधी बीमारियों का कारण :
मानसून के दौरान स्वच्छ पानी मिलना मुश्किल हो जाता है, ज्यादातर जगहों पर दूषित पानी होता है इस पानी के सेवन से कई पाचन संबंधी परेशानियां पैदा होती है। बाहर ही नहीं घरों में सप्लाई होने वाला पानी भी पूरी तरह स्वच्छ नहीं माना जाता डॉक्टर द्वारा सलाह दी जाती है कि की मानसून के समय पानी को उबालकर पीना चाहिए मौजूद सभी सक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। दूषित जल स्रोतों के कारण हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी जलजनित बीमारियाँ अधिक प्रचलित होती हैं। अपने पाचन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए, उचित स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। केवल शुद्ध या उबला हुआ पानी पिएं और दूषित पानी में धुली हुई कच्ची सब्जियाँ, फल या स्ट्रीट फ़ूड खाने से बचें। पानी से भरे इलाकों से गुजरने के बाद, और साफ-सफाई बनाए रखना संक्रमण के जोखिम को कम करता है।
खान पान का रखना होता है खास ध्यान :
बारिश में पानी के बाद खाना पाचन संबंधी परेशानी और समस्याओं का दूसरा अहम कारण है। इस मौसम में खाना बहुत जल्दी खराब होता है या हम कहें कि वातावरण में हर जगह नामी मौजूद होने की वजह से नमी मैं सूक्ष्म जीव फंगस आदि मौजूद होते हैं जिसकी वजह से खाना जब इस वातावरण की नमी के संपर्क में आता है तो वह दूषित हो जाता है और खराब हो जाता है। इस मौसम में गर्म, पका हुआ भोजन पचाने में आसान होता है। सूप, स्टू और उबली हुई सब्जियाँ जैसे हल्के और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। मानसून में ताज़ी उपज की भरमार होती है, लेकिन खाद्य पदार्थों के स्रोत और भंडारण के बारे में सतर्क रहना ज़रूरी है। कच्ची सब्ज़ियों और फलों में बैक्टीरिया और कीटाणु हो सकते हैं।
मॉनसून में पाचन संबंधी समस्याओं से निजात पाने के कारगर उपाय।

मानसून के मौसम में पाचन संबंधी बीमारियों से बचने के कई उपाय हैं जिन्हें हम अपना कर अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रख सकते हैं। मानसून में पाचन संबंधी समस्याओं के कारण पर तो हमने प्रकाश डाल दिया है। अब इनसे बचने के उपाय के बारे में बात करते हैं जिसके लिए सबसे पहले हमें अपनी लाइफस्टाइल को चेंज करना होता है। उचित स्वच्छता का पालन करना, सुरक्षित और पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना और हाइड्रेशन बनाए रखना पाचन संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है। आइए जानते हैं पाचन संबंधी समस्याओं से निपटने के कारगर उपाय।
- मानसून के मौसम में सबसे पहली बात जो होती है वह हमें अपनी लाइफ स्टाइल को चेंज करना होता है हर मौसम में लाइफ़स्ट शैली को कुछ चेंज करना जरूरी होता है अतः उसे मौसम के लिए अपने शरीर को अनुकूल बनाने के लिए यह जरूरी होता है। इस मौसम में पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं इसीलिए यह जरूरी है कि हमें पाचनसंबंधित प्राणायाम योग आदि अपने जीवन शैली में अपनेहोंगे।
- इस मौसम में वातावरण में उमस बढ़ जाती है जिसकी वजह से प्यास कम लगती है और प्यास ना लगने की वजह से हम पानी नहीं पीते जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसीलिए यह जरूरी है की प्यास ना लगने पर भी हम पानी का सेवन समय-समय पर करते रहें जिससे खाना सही तरीके से पच सके।
- अपने आहार में आंत के अनुकूल खाद्य पदार्थों को शामिल करने से मानसून के दौरान पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है। साबुत अनाज, फलियां और ताजी सब्जियों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन नियमित मल त्याग को बढ़ावा देने और कब्ज को रोकने में मदद करता है।
- मानसून में ताज़ी उपज की भरमार होती है, लेकिन खाद्य पदार्थों के स्रोत और भंडारण के बारे में सतर्क रहना ज़रूरी है। कच्ची सब्ज़ियों और फलों में बैक्टीरिया और कीटाणु हो सकते हैं, इसलिए उन्हें खाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना या पकाना संक्रमण से बचाता है।
- इस मौसम में पीने का पानी साफ मिल जाए यह जरूरी नहीं, इसलिए पानी को 15 मिनट उबाल कर ठंडा कर छानकर पीना चाहिए।
- भारी भोजन आपकी गैस्ट्राइटिस की समस्या को तकलीफदेह बना देता है। इसके अलावा अपने आहार में लैक्टोज और ग्लूटन जैसे आहार लेने से बचें।
- पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए नींद पूरा होना भी एक महत्वपूर्ण कारण है इसीलिए अच्छी नींद ले। समय से सोए और समय पर उठें।
- अगर आपके पाचन अंग जैसे पेट, अग्न्याशय और छोटी आंत अपने चरम पर काम नहीं कर रहे हैं, तो गैस, एसिडिटी, पेट फूलना और लगातार पेट भरा होने का एहसास जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। ज्यादा परेशानी होने पर चिकित्सक की सलाह लें।
