सार :

जिसका इंतजार सरकारी केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से कर रहे थे वह मौका आ चुका है। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने आठवें वेतन को मंजूरी दे दी है। इस प्रकार कैबिनेट बैठक ने सरकारी केंद्रीय कर्मचारियों के पक्ष में यह बड़ा फैसला लिया है। लेकिन आप बड़ा सवाल है उठ रहा है कि तनख्वाह बढ़ाने के साथ-साथ कर्मचारी के ऊपर इनकम टैक्स का भी भार बढ़ जाएगा। सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ने से आयकर स्लैब में भी बदलाव होंगे तो आईए जानते हैं पूरी खबर विस्तार में।

विस्तार :

जैसे ही केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में आठवें वेतनमान को मंजूरी मिली तभी से केंद्रीय कर्मचारी बेसब्री से वेतन बढ़ाने का इंतजार कर रहे हैं अब तक यह देखने में आया है कि जब जब सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि हुई है तब तब सरकार को इनकम टैक्स के द्वारा काफी फायदा भी हुआ है, क्योंकि जब भी सरकारी कर्मचारियों के वेतनमान में वृद्धि होती है तब आयकर स्लैब में भी बदलाव किया जाता है जिससे पैसा बाजार में खर्च होने से इकोनामी मजबूत होती है। बाजार में सरकारी कर्मियों की खरीदारी तेजी से बढ़ती है जिससे बड़े हुए वेतन का 20% हिस्सा अप्रत्यक्ष रूप से कर के रूप मैं केंद्र सरकार को जाता है। बता दें कि सातवेंवेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो जाएगा और आठवें वेतन आयोग का कार्यकाल 1 जनवरी 2026 से शुरू हो जाएगा। साथ में यह भी बता दें कि आजादी के बाद 1947 के बाद सात वेतन आयोग गठित किए गए हैं। अधिकतर राज्य सरकारें भी अपने राज्य कर्मचारियों के लिए इसी का पालन करती हैं।

कैबिनेट बैठक में मिली आठवी वेतन आयोग की मंजूरी केबाद सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह सुनिश्चित किया जाएगा की सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल पूरा होने से पहले आठवी वतन वेतन अथवा नए वेतन आयोग की सिफारिश मिल जाए। वैष्णव ने यह भी बताया कि नए वेतन आयोग के लिए अध्यक्ष और दो सदस्यों की नियुक्ति जल्दही की जाएगी केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स को फिलहाल उनकी बेसिक सैलरी का 53% डीए/डीआर मिल रहा है जनवरी 2025 में इसमें फिर बढ़ोतरी प्रस्तावित है।

सातवें वेतनमान में कर्मचारियों की कितनी सैलरी में बढ़ोतरी हुई थी?

7वां वेतन आयोग का गठन साल 2016 में किया गया था, तब बेसिक सैलरी 18000 रुपये हो गई थी। वहीं उससे पहले कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी 7000 रुपये थी, जो 6वें वेतन आयोग के तहत था। 7वें वेतन आयोग के तहत, 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिसके कारण केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी में 2.57 से गुणा किया गया। यह उनके मूल वेतन में 2.57% की बढ़ोतरी के बराबर था। इसके विपरीत, 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था, जिससे सरकारी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 1.86% की बढ़ोतरी थी। अगर फिटमेंट फैक्टर को भी बढ़ाया जाता है तो यह 2.57 से बढ़ाकर 2.86 किया जा सकता है, जिससे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जबरदस्‍त उछाल हो सकता है।

आठवी वेतनमान लगने से कर्मचारियों को क्या फायदे मिलेंगे?

बता दें कि भारत में केंद्र सरकार हर 10 साल में नया वेतन आयोग लाती है। अभी सभी कर्मचारियो का 7वां वेतन आयोग चल रहा है, इसका कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म होगा। साल 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू हो जाएगा।8वें वेतन आयोग का वेतन मैट्रिक्स 1.92 के फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल करके तैयार किया जाएगा। इसे ऐसे समझिए- केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी के 18 लेवल हैं। लेवल-1 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 1800 रुपए ग्रेड पे के साथ 18,000 रुपए है। इसे 8वें वेतन आयोग के तहत बढ़ाकर 34,560 रुपए किया जा सकता है। इसी तरह केंद्र सरकार में कैबिनेट सचिव स्तर के अधिकारियों को लेवल-18 के तहत अधिकतम 2.5 लाख रुपए की बेसिक सैलरी मिलती है। यह बढ़कर तकरीबन 4.8 लाख रुपए हो सकती है। 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद लेवल-1 के एक कर्मचारी की बेसिक सैलरी 34,560 रुपए हो गई है तो इसकी 50% रकम 17,280 रुपए होती है। इस हिसाब से कर्मचारी को 17,280 रुपए+DR की धनराशि पेंशन के तौर पर मिलेगी। हालांकि, यह रेयर केस में ही होगा कि कोई कर्मचारी लेवल-1 पर नौकरी जॉइन करने के बाद रिटायरमेंट तक उसी लेवल पर रहे। प्रमोशन और अन्य नियमानुसार समय-समय पर इस लेवल में बढ़ोतरी होती रहती है। इसलिए कर्मचारी को इससे कहीं ज्यादा धनराशि पेंशन के रूप में मिलेगी।

देश में वेतन से व्यक्तिगत आय 2016-17 में कुल 13.96 लाख करोड़ रुपए थी। सातवां वेतनमान लगने के बाद वेतन से व्यक्तिगत आय 2017-18 में बढ़कर 15.94 लाख करोड़ रुपए हो गई। यानी 14.18% की बढ़ोतरी हुई।

इससे न्यूनतम मूल वेतन 51,480 रुपये हो जाने की संभावना है। इस तरह के कदम से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। उनकी खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे उपभोक्ता खर्च भी बढ़ सकता है। कर्मचारी और पेंशनभोगी आशा करते हैं कि 8वां वेतन आयोग उनकी चिंताओं का समाधान करेगा। साथ ही, ऐसे सुधार लाएगा जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

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