सार :

अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आधिकारिक तौर पर 11 जून, 2026 को प्रशांत महासागर में अल-नीनो के आगमन की पुष्टि कर दी है। अब भारत के मॉनसून समेत विश्व भर के मौसम पर अल नीनो का काला साया मंडराने लगा है। यह भारत ही नहीं पूरे विश्व भर के मौसम पर बुरा असर डालेगा। अगर अल नीनो ने भारत को प्रभावित किया तो भारत में सूखे की सम्भावना बढ़ जाएगी। आईए जानते हैं अल नीनो अलर्ट।

विस्तार :

प्रशांत महासागर में अल नीनो के पैदा हो जाने की वज़ह से देश के मॉनसून पर असर दिखने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि देश के बड़े हिस्से में मॉनसून अचानक बेहद कमजोर हो गया है। अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरो में मॉनसून का बादल पूरी तरह गायब नज़र आ रहा है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का मानना है कि इतना ही नहीं मॉनसून के चले जाने के बाद भी अल नीनो देश को परेशान करता रहेगा। अल नीनो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर के मौसम को प्रभावित करता रहेगा। अल नीनो एक मौसमी घटना है लेकिन वैज्ञानिक इसे सुपर अल नीनो कह रहे हैं क्योंकि यह इस बार प्रबल स्थिति में है।

अल नीनो प्रभाव अब सक्रिय हो चुका है और पूरे मानसून सीजन के दौरान इसके बने रहने की संभावना है। बता दें कि अल नीनो से दुनिया के कुछ इलाकों में अधिक बारिश और बाढ़ का खतरा रहता है, जबकि कुछ हिस्सों में सूखा और तेज गर्मी ला सकता है। अल नीनो का भारत पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। अभी भारत में मॉनसून सीजन है और इस सीज़न में अल नीनो मॉनसून पर ही प्रभाव डालेगा जिससे कम बारिश होने की प्रबल संभावना बताई जा रही है।

आखिर क्या है यह अल नीनो (El Nino) :

अल नीनो की पूरी घटना।

महासागरों में हमेशा कोई न कोई मौसमी घटनाएं चलती रहती हैं जो सामान्य है और इन घटनाओं का असर आसपास के प्रायद्वीपों पर पढ़ता है। कई बार समुद्रों में असामान्य घटनाएं भी होती हैं जिनका बुरा प्रभाव आसपास के देशों पर पढ़ता है या हम कहें की वहां रह रही आबादी पर पढ़ता है। ऐसी ही एक घटना अल नीनो भी है, जो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी इलाकों में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ा देती है इससे ही अल नीनो पैदा होता है। सरल शब्दों में कहें तो अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के गर्म होने से बनता है। अल नीनो से दुनिया के कुछ इलाकों में अधिक बारिश और बाढ़ का खतरा रहता है, जबकि कुछ हिस्सों में सूखा और तेज गर्मी ला सकता है।

देश में इसका कितना असर होगा ?

अल नीनो दुनिया के सबसे बड़े महासागर की घटना है जो सभी देशों को प्राभावित करती है। सामान्य परिस्थितियों में, प्रशांत महासागर में चलने वाली तेज हवाएं गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं, जिससे हमारे क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है। लेकिन अल-नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिसके कारण मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है कहीं तेज बारिश तो कहीं सूखा पढ़ता है। बता दें कि भारत में इसका असर जून-अगस्त के दौरान 80 फीसदी देखा जाएगा और कम से कम नवंबर तक इसके बने रहने की संभावना 90 फीसदी या उससे अधिक है। हालांकि, देश में जलाशयों का जलस्तर सामान्य भंडारण से अधिक है। और सब्जियों की आवक के आंकड़े भी संतोषजनक हैं।

मॉनसून और भारत पर अल नीनो का प्रभाव :

  • अल नीनो का सबसे अधिक प्रभाव मॉनसून पर पढ़ रहा है। इसके प्रभाव से देश के कई हिस्सों में बहुत कम बारिश होने की प्रबल संभावना बताई जा रही है।
  • गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश में कम बारिश के कारण फसलों को भारी नुकसान होने का खतरा है।
  • अल नीनो के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में सूखा पढ़ सकता है।
  • सूखा पढ़ने या बारिश के कम होने से इसका सीधा असर किसानो पर यानी फसल उत्पादन पर पढ़ने वाला है।
  • फसल उत्पादन में गिरावट आने से खाद्य पदार्थों की कीमतों (महंगाई) में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि सूखा पड़ा तो उत्पादन में कमी और देश की जीडीपी में भारी गिरावट देखी जाएगी।

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