1.प्रार्थना या अध्यात्म के पल।
जब हम प्रार्थना करते हैं या अध्यात्म मैं ध्यान लगाते हैं तो उसकी वंदना और स्तुति करते हैं तो वह खुद को बेहतर व भाग्यशाली इंसान समझते हैं खुद को प्रभु के प्रति समर्पित करके वह हल्का महसूस करते हैं ठीक ऐसे ही सुकून अध्यात्म के पल के द्वा महसूस होते हैं।
2.पुराने फोटो एल्बम देखना।
जब जब आप पुरानी फोटो एल्बम को उलट-पुलट कर देखते हैं तो वक्त कब कुचल कुचल को लांचे मारने लगता है पता ही नहीं चलता आप बीते जमाने में हते जा रहे होते हैं आप बीते जमाने में खो जाते हैं कभी परेशानियां विचलित हो तो मन को सुकून देने के लिए आप पुराने फोटो एल्बम को देखकर सुकून का अनुभव करेंगे।
3 भोर में बाहर घूमना।
अगर आप देर से जागते हैं और किसी दिन सुबह 5:00 बजे उठकर किसी नदी किनारे चले जाएगा या अपने घर की छत पर या बालकनी में निकल जाए और सूरज की होती हुई लालिमा को देखे और आसमान में पक्षियों की चहचहाहट सुबह की ताजी हवा से सरसराती पेड़ों की पत्तियां की आवाज अनोखा अनुभव प्रदान करती है ।
4.बच्चों के साथ खेलें।
छोटे बच्चों के साथ खेलना खेल कूद मचा खेलकूद करना और उधम मचाना खुद फोन से दूर भाग कर उन्हें पकड़ने के लिए कहना अतुलनीय खुशी देने वाला एहसास होता है।
5. किसी प्रिय जन का आलिंगन।
भाई बहन दोस्त मां और किसी भी आत्मीय परिजन का प्यार भरा हुआ लिनन हृदय की खुशी देखी गहराई तक खुशी सुकून सुरक्षा उस्मा सहानुभूति प्यार और स्नेह का एहसास दे सकता है मनोवैज्ञानिक का मानना है कि ऐसा ऑक्सीटोसिन हार्मोन के रिलीज होने से होता है सेहत विशेषज्ञ इसे कटल हार्मोन भी कहते हैं।
6. बाथरूम सिंगिंग करना ।
दुनिया में ज्यादातर लोग और कहीं गए या नहीं आए ना देश में बाथरूम में जरूर गान गुनगुनाते हैं यहां उनका सुरीला होना मायने नहीं रखता गाने से मन को मिल रहा अप्रतिम सुकून महत्वपूर्ण होता है कई शोधों में प्रमाणित हो चुका है कि बाथरूम सिंगिंग लोगों को आंतरिक खुशी देती है।
