मध्य प्रदेश में चुनावी माहौल बहुत गर्माया हुआ है, चारों तरफ पार्टियां अपने प्रचार में लगी हुई है और अब प्रचार का अंतिम चरण चल रहा है। कुछ ही दिनों में आचार संहिता भी लग जाएगी। वही आचार संहिता लगने से एन मौके पहले शिवराज सरकार ने मध्य प्रदेश को लेकर एक बड़ा फैसला ले लिया है, चुनाव से पहले शिवराज सरकार ने मध्य प्रदेश का नक्शा और सामान्य ज्ञान दोनों बदल दिए हैं। बुधवार देर रात तक चली कैबिनेट की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। इसके बाद गुरुवार को सरकार ने मैहर और पांढुर्णा को जिला बनाने की घोषणा कर दी और आदेश जारी कर दिए। इसके साथ प्रदेश में अब जिलों की संख्या 55 हो गई है।
बता दें कि यह नोटिफिकेशन के बाद रात को ही दोनों नए जिलों में कलेक्टर भी अप्वॉइंट कर दिए गए हैं। नए जिले मैहर में रानी वाडट कलेक्टर होगी। वह अभी शहडोल संभाग में अपर आयुक्त राजस्व थी। इसी तरह पांढुर्ना में अजय देव शर्मा को कलेक्टर नियुक्त किया गया है वह अभी उज्जैन जिला पंचायत में सीईओ थे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी साल 20 जुलाई को नागदा को भी जिला बनाने की घोषणा कर दी थी लेकिन वहां के लोगों के द्वारा विरोध और आपत्तियों के चलते नागदा को जिला बनाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और अभी इस निर्णय को जनता पर छोड़ दिया गया है। जिस तरह नए जिले बनाने की घटना को चुनावी दाव पेच बताया जा रहा है और बताया जा रहा है कि इससे विधानसभा चुनाव में फर्क पड़ेगा लेकिन सरकार का कहना है कि मौजूदा विधानसभा चुनाव में इन जिलों के बदलने का कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
बता दें कि नए जिले बनने से 10 लाख लोगों के पते बदलने पड़ेंगे वहीं आधार से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक हर दस्तावेज में बदलाव भी होगा। हर सरकारी कागज में बदलाव करना पड़ेगा। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी।

कैसे बने मैहर और पांढुर्णा अलग जिले:
- * मैहर सतना से अलग होकर मैहर बनेगा। आबादी करीब 7.50 लाख है इसमें मैहर तहसील के 122, अमरपाटन के 53 और रामनगर के 59 पटवारी हल्के शामिल होंगे।
- * वहीं अगर पांढुर्णा जिले की बात करें तो पांढुर्णा जिला छत्तीसगढ़ जिले से अलग करके बनाया जाएगा। इसकी आबादी 3.75 लाख होगी। संभवत सबसे छोटा जिला होगा। पांढुर्णा तहसील के 74 सौंसर के 63 पटवारी हल्के शामिल होंगे इसमें।
- नागदा जिले में आ रही है परेशानियां:
- नागदा को 20 जुलाई को जिला बनाने की घोषणा सीएम ने कर दी थी और यह निर्णय जनता पर छोड़ा था। राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि उज्जैन की उन्हेल, खाचरोद, रतलाम की लाल और आलोट तहसीलों में लोगों ने नए जिले पर आपत्तियां लगाई है उज्जैन की तहसीलों के लोग धार्मिक नगरी उज्जैन से पीडिया से जुड़े हैं और वह उज्जैन से अलग नहीं कहलाना चाहते इसीलिए सरकार ने यह मामला ठंडा बस्ते में डाल दिया है।
- नए जिले बनने से क्या राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा:
- पांढुर्णा को जिला बनाकर मौजूदा सरकार कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा को ढहाने का प्लान बना रही है जिला बनाकर भाजपा ने पांढुर्ना के नागरिकों की सालों पुरानी मांगों को पूरा कर दिया है क्षेत्र में सेंध लगाने की कोशिश भी हो चुकी है। वहीं कांग्रेस से बीजेपी में आए विधायक नारायण त्रिपाठी मैहर को जिला बनाने की मांग उठा रहे थे। जिला बनते ही बीजेपी को चुनाव में विरोध नहीं झेलना पड़ेगा और नए जिले बनने से पार्टी को फायदा भी पहुंचेगा।
