सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश और राजस्थान की वित्तीय हालत बेहद ही खराब है मुफ्त की योजनाएं चलाने से प्रति व्यक्ति कर बढ़ता जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान ,केंद्र सरकार और चुनाव आयोग सहित आरबीआई को मुफ्त की लुभावनी योजनाओं पर टैक्स के कुल कमाई का 35% तक का हिस्सा फ्री की योजनाओं पर लूटlने पर नोटिस भेजा है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीख है दो-तीन दिन में घोषित होने वाली है सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चुनाव से पहले मुफ्त की लुभावनी योजनाओं के ऐलान पर मध्य प्रदेश, राजस्थान, केंद्र सरकार और आरबीआई को नोटिस भेजा है। चार हफ्ते में जवाब मांगा है चीफ जस्टिस डी बाय चंद्रचूड़ ने जनहित याचिका पर यह आदेश जारी किया है कहां ऐसी सभी याचिकाएं एक साथ सुनेंगे।
आरबीआई की 31 मार्च से 23 तक की रिपोर्ट में सामने आया है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान ,पंजाब ,पश्चिम बंगाल जैसे राज्य टैक्स के कुल कमाई का 35% तक का हिस्सा फ्री की योजनाओं में खर्च कर रहे हैं। पंजाब 35% से ज्यादा के साथ सूची में टॉप पर खड़ा हुआ है। वही मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी इसमें 28.8 परसेंट बताई जा रही है राजस्थान में 8.6% आंध्र प्रदेश अपनी आय का 30 परसेंट हिस्सा फ्री की योजनाओं में लुटाता जा रहा है। वहीं झारखंड 26.7 परसेंट और बंगाल 23.8% तक फ्रीबीज के नाम पर कर देता है केरल 0.1% हिस्सा फ्रीबीज को देता है।

अगर मध्य प्रदेश की बात करें तो शिवराज सरकार 36,000 करोड़ से अधिक का मुफ्त योजनाएं दे चुकी है। लाडली बहनl 1.31 करोड़ को 1250 रुपए के हिसाब से 1259 करोड रुपए सितंबर में दिए 9 महीने में 11,250 करोड रुपए खर्च। वहीं सस्ता सिलेंडर करके 450 रुपए में रसोई गैस की सब्सिडी के लिए 36 लाख लाडली बहनl के खाते में 219 करोड रुपए की राशि दी है वहीं कई और योजनाएं जैसे लाड़ली लक्ष्मी योजना, ग्रह ज्योति योजना को लेकर मध्य प्रदेश राज्य करीब 1.39 लाख करोड़ की घोषणाएं कर चुका है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस में फ्रीबीज को लेकर चुनौती दी है उनका कहना है कि आरबीआई की रिपोर्ट के हिसाब से मध्य प्रदेश व राजस्थान की वित्तीय हालत बेहद खराब है। इसके बावजूद दोनों राज्यों में नगद लाभ की योजनाएं हो सकती हैं सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा चुनाव से पहले वादे करने की परंपरा है क्या इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इस पर याचिकाओं ने कहा सार्वजनिक हित के लिए एक रेखा खींचनी ही होगी।

अब सवाल यह उठता है कि फ्री की योजनाएं चलाने से लाभ होगा किसको? क्योंकि यह सब चुनावी वादों के चलते महंगाई को और बढ़ावा दे रहे हैं। फ्री की योजनाएं चलाने से प्रति व्यक्ति कर और ज्यादा बढ़ जाता है और महंगाई में बढ़ोतरी होती है। प्रदेश पर कर्ज तो बड़ा ही हुआ है और फ्री की योजनाएं चलाने से प्रति व्यक्ति कर बढ़ता जा रहा है। वहीं कांग्रेस भी चुनाव के चलते बड़े-बड़े वादे कर रही है महिलाओं को हर महीने ₹1500 देने का वादा किया है जिससे एक साल का अनुमानित खर्च 15000 करोड रुपए आ रहा है किसानों को मुफ्त बिजली देने का वादा किया है 100 यूनिट बिल माफ और 200 यूनिट हाफ किए जाने में हर साल 20,000 करोड़ का खर्चा आ रहा है इस तरह प्रदेश पर कर्ज बढ़ता जा रहा है और प्रदेश की हालत और भी बुरी होती जा रही है
