केदारनाथ धाम के खुलने व बंद होने का निर्णय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किया जाता है। मंदिर के कपाट खुलने का निर्णय अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर निर्भर करता है। वहीं अन्य धामो जैसे गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के खुलने और बंद होने का निर्णय भी ज्योतिष के अनुसार ही किया जाता है। केदारनाथ मंदिर के कपाट दीपावली के दो दिन बाद यानी भैया दूज को बंद कर दिए जाएंगे जो लगभग 6 महीनो तक बंद रहेंगे। इन 6 महीनो में बाबा केदारनाथ की पूजा ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।

2023 में केदारनाथ धाम के कपाट 14 नवंबर को बंद होंगे बंद होने की तिथि की घोषणा विजयदशमी को होती है वही गंगोत्री धाम के कपाट भी 14 नवंबर को बंद किए जाएंगे। बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख भी विजयदशमी के दिन ही तय की जाएगी और यमुनोत्री धाम के कपाट 15 नवंबर को बंद किए जाएंगे।

इसके अलावा पौराणिक मान्यताओं की माने तो महाभारत युद्ध के उपरांत पांडवों ने पितरों का कर्मकांड किया तथा भाई दूज के दिन वे स्वर्ग सिधार गए इसीलिए भाई दूज को इन दोनों मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

बता दें कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग व चमोली जिलों में यह दोनों मंदिर स्थापित हैं अक्टूबर व नवंबर महीनो में यहां बर्फबारी शुरू होने लगती है या ठंड का मौसम शुरू हो जाता है जिसके चलते आवागमन भी स्थगित रहता है इसीलिए इन मंदिरों को 6 महीनो के लिए बंद कर दिया जाता है और भगवान शिव की पवित्र मूर्ति को उखीमठ ओंकारेश्वर मंदिर में स्थानांतरित कर दिया जाता है और वहां 6 महीना तक बाबा केदारनाथ की पूजा की जाती है। कपाट खुलने से पूर्व इन्हें केदारनाथ धाम में ही पुनर्स्थापित कर दिया जाता है।

वहीं अगर बद्रीनाथ मंदिर की बात करें तो उनके कपाट बंद होने के बाद बद्रीनाथ भगवान की पूजा जोशीमठ के नरसिंहहा मंदिर में स्थित बद्री विशाल उत्सव मूर्ति के रूप में चलती रहती है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के दरवाजे बंद करने से पूर्व पुजारी गर्भ ग्रह में मूर्ति के सामने एक दीपक जलlते हैं जो 6 महीने बाद भी मंदिर खुलने पर जलता हुआ मिलता है।

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