देश के सभी हिस्सों में ठंड का दौर शुरू हो चुका है लेकिन इसके चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान में वेरिएशंस दर्ज किए गए हैं। देश के सभी हिस्सों का मौसम अलग-अलग दर्ज किया गया है। कहीं बारिश का हाई अलर्ट जारी किया गया है तो कहीं बर्फबारी की संभावना बताई है। कहीं पारा ऊपर चढ़ रहा तो कहीं शहरों में चारों तरफ धुंध की समस्या पैदा हो गई है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस देश के मौसम का हाल-बदल रखा है हर हिस्से में मौसम के मिजाज अलग-अलग है वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण कई जगह आंधी तूफान और बारिश के आसार बन चुके हैं तो कहीं पारे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
देश के ऊपरी हिस्सों में आज बारिश और हल्की बर्फबारी के आसार हैं तो निचले हिस्सों में भी बरसात का सिलसिला जारी रहने वाला है हालांकि मैदानी इलाकों के मौसम में कोई खास फेर बदल की उम्मीद नहीं की जा रही है दर असल आज यानी 23 नवंबर को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है इसका अधिकांश प्रभाव केवल मध्य और ऊंचे इलाकों तक ही सीमित रहेगा। जिससे बर्फबारी की संभावना है। हाल ही में आया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक कमजोर तूफान है उम्मीद है कि इस सिस्टम की वजह से थोड़े समय के लिए मौसम कमजोर स्थिति में आएगा हालांकि इसका अधिकांश प्रभाव केवल मध्य और ऊंचे इलाकों तक ही रहेगा जबकि अधिकतम प्रभाव ऊंचे इलाकों पर होगा इससे पश्चिमी हिमालय की पहाड़ियों के ऊपरी इलाकों में हल्की बर्फबारी और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
देश की राजधानी दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम और प्रदूषण के क्या है हालात: –
राजधानी दिल्ली के मौसम में इन दिनों कोई खास तब्दीली देखने को नहीं मिल रही है हालांकि यहां की हवा बिगड़ती जा रही है मौसम पूर्वानुमान एजेंसी के मुताबिक इस हफ्ते दिल्ली वालों को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। तापमान की बात करें तो दिल्ली में आज न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने वाला है। दिल्ली में कोहरा बढ़ सकता है। दिल्ली की हवा में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और जहरीली होती जा रही है यहां की हवा। एक बार फिर से दिवाली के बाद दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है दिल्ली ,नोएडा, ग्रेटर नोएडा ,फरीदाबाद ,गाजियाबाद समेत एनसीआर के विभिन्न इलाकों में हवा की गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब श्रेणी में दर्ज किया गया है।

देश की राजधानी दिल्ली बीते 5 सालों में सबसे प्रदूषित शहर रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार दिल्ली की वायु की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है। इसके चलते सीएम के निर्देश के अनुसार पांचवी तक के स्कूल भी कुछ दिनों पहले बंद किए गए थे ऑनलाइन क्लास लगा कर उन्हें पढ़ाया जा रहा था। सीएम के द्वारा ऐसे सभी के कामों पर रोक लगा दी गई है जिससे की हवा और प्रदूषित हो सकती है और हवा में धुंध बढ़ सकती है। जैसे कि राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के अलावा सभी तरह की निर्माण गतिविधियों को रोक दिया गया है। सड़कों की झाड़ू से सफाई नहीं होगी नियमित तौर पर पानी का छिड़काव किया जाएगा। बस समेत सभी तरह के सार्वजनिक वाहनों की संख्या बढ़ाई गई है। पत्थरों की कटाई जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई गई है, थर्मल पावर प्लांट पर नजर रखी जाएगी आदि इस तरह की घटनाओं को रोका गया है और वायु की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रयास किया जा रहे हैं।
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों का मौसम:-
उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों के मौसम की बात करें तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सुबह से कोहरा और धुंध के बाद आसमान मुख्यतः साफ रहेगा। उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर साफ दिखाई दे सकता है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के साथ यहां ठंड में बढ़ोतरी हो सकती है अगर अभी तक यहां के तापमान की बात की जाए तो यहां का न्यूनतम तापमान लगभग 14 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो यहां आज बादल छाए रहेंगे कुछ राज्यों में बादल छाए रहने की वजह से पारा एक दो डिग्री तक बढ़ भी सकता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण यहां भी मौसम में उलट फेर की संभावना जताई जा रही है।
दक्षिण भारत में कई राज्यों में बारिश की संभावना:-
मौसम विभाग के मुताबिक आज तमिलनाडु और केरल में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है कुछ स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी भी दी गई है लक्षद्वीप और दक्षिण कर्नाटक में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। आंध्र प्रदेश, ओड़िशा और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में हल्की बारिश संभव है। वहीं गोवा के कई इलाके ,दक्षिणी कोंकण और गोवा के साथ-साथ दक्षिणी मध्य महाराष्ट्र में भी हल्की बारिश संभव है। वहीं पश्चिमी हिमालय पर छुटपुट बारिश की संभावना जताई गई है।
केरल, तमिलनाडु ,आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भी मौसम विभाग के द्वारा दी गई है। पश्चिमी विकशॉप के कारण एक बार फिर से दक्षिणी इलाकों में मानसून एक्टिव हो चुका है जिससे की बारिश होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। बारिश होने के चलते इन इलाकों में बारिश थमने के बाद ठंड में बढ़ोतरी देखी जाएगी। वहीं देश में पश्चिमी विकशॉप के जाने के बाद तेज ठंड का दौर शुरू हो जाएगा। क्योंकि अभी तक तेज ठंड का दौर शुरू नहीं हुआ है। आसमान में बादल छाए रहे हैं जिससे कि तेज ठंड नहीं पड़ रही है अगर हम पिछले सालों की बात करें तो अभी तक तेज ठंड का दौर शुरू हो चुका होता था लेकिन इस बार पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो अब सिर्फ मानसून ही नहीं वेस्टर्न डिस्टरबेंस पर भी असर डाल रहा है ऐसे में आगे भी पारा सामान्य से ज्यादा रह सकता है।
मध्य भारत में कैसा रहेगा मौसम:-
मौसम विभाग के अनुसार मध्य भारत मैं सर्दी में पारा सामान्य से ज्यादा 20 साल में नवंबर में सिर्फ चार बार 10 डिग्री से नीचे रहा है। नवंबर माह के 22 दिन बीत चुके हैं लेकिन इस दौरान प्रदेश में एक भी बार रात का तापमान 12 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं आ सका है। पिछले करीब 10 दिन से रात का तापमान 15 से 16 डिग्री से ज्यादा है दिन में भी लगातार धुंध छा रही है तापमान सामान्य से कम नहीं हो रहा है खास बात यह है कि पिछले 20 साल में नवंबर में सिर्फ चार बार ही कड़ाके की ठंड पड़ी है। तब रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे आ गया था। इसकी वजह बताते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि एल नीनो अब सिर्फ मानसून को प्रभावित नहीं करता वेस्टर्न डिस्टरबेंस पर भी असर डाल रहा है इसीलिए तेज ठंड पड़ने का ट्रेंड भी बदलता जा रहा है।
प्रदेश के कई शहरों में सुबह से धुंध छाई रहने की समस्या पैदा हो रही है भोपाल में बुधवार को सुबह से शाम तक धुंध और कुहासा छाया रहा। विजिबिलिटी की बात करें तो 1200 मीटर तक विजिबिलिटी रही है दिन का तापमान 30 डिग्री और रात का तापमान 15 डिग्री दर्ज किया गया है। अगर सामान्य से इन तापमान की गणना करें तो 2 डिग्री ज्यादा है।
अल नीनो और वेस्टर्न डिस्टरबेंस आखिर क्या होता है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर के मध्य भूमध्य रेखीय क्षेत्र में इक्वाडोर एवं पेरू तट पर समुद्र सतह का असामान्य रूप से गर्म होना है। यहां तापमान सामान्य से चार से पांच डिग्री ज्यादा होता है। एल नीनो जटिल मौसम पैटर्न है जो विषुवतीय प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में समुद्र के तापमान में भिन्नता के कारण घटित होता है। यह एल नीनो दक्षिणी दोलन चक्र की विपरीत अवस्थाएं होती हैं। एल नीनो का मतलब है कि तटीय सतह के जल के गर्म होने के कारण अनियमित और तीव्र जलवायु परिवर्तनों का होना है। यह एक नियमित चक्र नहीं होता यह दो से सात वर्ष के अंतराल पर अनियमित रूप से होता है। इस बार अल नीनो का प्रभाव देखा जा रहा है जिससे कई इलाकों में तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।
Western disturbance(पश्चिमी विक्षोभ):-
पश्चिमी विक्षोभ या वेस्टर्न डिस्टरबेंस भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाकों में सर्दियों के मौसम में आने वाले ऐसे तूफान होते हैं जो वायुमंडल की ऊंची सतहों में भूमध्य सागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर उसे अचानक वर्षा और बर्फ के रूप में उत्तर भारत, पाकिस्तान व नेपाल पर गिरा देते हैं। उत्तर भारत में रवि की फसल के लिए विशेष कर गेहूं के लिए यह तूफान अति आवश्यक होते हैं। मानसून और पश्चिमी विक्षोभ का बिल्कुल भी संबंध नहीं है यह मानसून से बिल्कुल अलग होते हैं मानसून की बारिशों में गिरने वाला जल दक्षिण से हिंद महासागर से आता है और इसका प्रभाव वायुमंडल की निकली सतहों पर होता है जबकि पश्चिमी विकशॉप का ऊपरी सतह पर होता है मानसून की फसल मानसून की बारिश खरीफ की फसल के लिए जरूरी होती है जैसे चावल आदि।
