साल 2023 में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए गए। जिसमें की भाजपा ने चार राज्यों में पूर्ण बहुमत हासिल कर अपनी सरकार बनाई। मध्य प्रदेश ,राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में भी इस साल विधानसभा के चुनाव हुए जिसमें भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया। पिछले कई सालों से मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार के होते इस साल भी भाजपा ने ही बहुमत हासिल कर जनता का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया लेकिन लंबे समय से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को इस बार भाजपा ने मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं चुना। इस बार मध्य प्रदेश में भाजपा ने मुख्यमंत्री के रूप में एक नए चेहरे को सामने लाया जिसके चलते 13 दिसंबर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में डॉक्टर मोहन यादव को शपथ दिलाई गई।
चुनावी साल के चलते मध्य प्रदेश सरकार ने कई घोषणाएं लागू की जिससे कि वह जनता को अपनी और आकर्षित कर सके और लुभा सके। यह सभी योजनाएं शिवराज सिंह चौहान जब मुख्यमंत्री थे उन्होंने तब लागू की थी लेकिन अब वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं है और यह उनकी योजनाएं मध्य प्रदेश को कर्ज में डूबा रही है। अब सबके सामने बड़ा सवाल यह उठता है कि शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जो योजनाएं शुरू की गई थी उनको लागू और चलते रहने के लिए आगे वाली सरकार क्या करेगी? चुनावी साल में हुई घोषणाओं को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को अगले 3 महीने में 25,000 करोड रुपए कर्ज लेना पड़ेगा। इससे लाडली बहन के 42,00 करोड़ और संविदा कर्मियों के बढ़ाए गए मानदेय को देने के लिए 15,00 से 2,000 करोड रुपए के साथ अन्य स्कीमों को पूरा करने पर लगने वाली राशि की भरपाई होगी।
लाडली बहन योजना में होगी छटनी या योजना होगी बंद?
शिवराज सरकार ने बीते दिनों चुनावी साल के चलते कई योजनाएं चलाई। जिसमें से कई फ्री स्कीम्स भी हैं जिससे कि राज्य पर पहले से ही कर्ज था और भी बढ़ चुका है। अब सवाल यह पैदा होता है कि शिवराज सरकार ने लोगों को आकर्षित करने के लिए यह योजनाएं चलाई थी लेकिन क्या अब नए मुख्यमंत्री इन योजनाओं को लागू रखेंगे या इनमें कई सुधार करेंगे क्योंकि लाडली बहन योजना जैसी योजनाओं से राज्य पर हजारों करोड़ों का कर्ज चढ़ता जाएगा। लाडली बहन के 42,00 करोड रुपए का कर्ज सरकार पर चढ़ रहा है। राज्य सरकार पर जो पुराने लोन चल रहे हैं। उसका मूलधन भी नए कर से जमा कराया जाएगा। साफ़ है कि इतना लोन लेने के बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 के खत्म होते-होते मध्य प्रदेश पर लगभग 4.530 लाख करोड रुपए तक का कर्ज होगा।
खजाने को देखते हुए नई सरकार के गठन से लेकर हर दूसरे दिन वित्त विभाग को रिव्यू करना पड़ रहा है हाल ही में विभाग ने एक सर्कुलर भी जारी कर दिया है कि जिसमें प्रमुख योजनाओं पर कटौती की तलवार लटक रही है। साथ ही कह दिया कि बिन उनकी मंजूरी के खजाने से पैसा जारी न किया जाए। इन स्कीमों में लाडली बहना का नाम तो सबसे ऊपर है ही, साथ ही महाकाल परिसर का विकास और मेट्रो ट्रेन जैसी योजनाएं भी शामिल है।
सहकारी बैंकों को अंश पूंजी तीर्थ यात्रा योजना, खेलो इंडिया, मध्य प्रदेश एफ टाइप और उसमें नीचे के सरकारी मकान की रखरखाव ,आरटीआई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की फीस ,डॉक्टर टंट्या भील मंदिर ,जीवन सुधार जैसे काम भी शामिल है। बता दें की सरकार ने चुनाव के कुछ महीने पहले ही बड़े बजट वाले योजनाओं को शुरू करने का फैसला किया और आचार संहिता लगने से पहले ही एक दिन पहले ही कई योजनाओं का शिलान्यास किया लेकिन उन्हें यह सोचना था कि राज्य सरकार पर करोड़ों का कर्ज पहले से ही है और भी ज्यादा कर्ज चल रहा है। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि 2024 25 के लेखानुदान से पहले एक अनु पूरक लाने पर कवायत चल रही है लेकिन अब तक सहमति नहीं बनी है।
फ्री की योजनायों में जनता को पैसा देना और जनता से ही वसूलना, क्या यह होगा सरकार का प्लान?
वैसे तो हर राज्य की सरकार पर थोड़ा ना थोड़ा कर्ज होता ही है लेकिन मध्य प्रदेश सरकार पर जरूरत से ज्यादा कर्ज मुसीबत का कारण बन रहा है क्योंकि जनता के लिए फ्री की योजनाएं चलाने वाली सरकार इसका भरपाई कैसे करेगी? महंगाई बढ़ाकर जनता से ही करवाई जाएगी कर्ज की भरपाई या सरकार कोई नई स्कीमो को निकाल कर कर मुक्ति का रास्ता निकालेगी। बता दे कि राज्य सरकार जिस तरह नई-नई बड़ी बजट की योजनाएं चला रही है उससे आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश के हर व्यक्ति पर लाखों का कर्ज चढ रहा है। स्थापना व्यय तो कम हो नहीं सकता है ऐसे में सरकार के पास विकास कार्यों के लिए अधिक राशि की व्यवस्था करने का एक ही रास्ता है कि वह स्वयं की आय बढ़ाई जाए।
सरकार को इंटरनल और एक्सटर्नल एजेंसियों से प्लानिंग और रिसर्च करना चाहिए। इससे कस्टमर बिहेवियर का पता चल सकेगा। वहीं ग्राउंड रियलिटी के आधार पर नई प्लानिंग करना चाहिए। बिजली कंपनियों का भुगतान भी इस कर्ज का एक बड़ा कारण है। बिजली कंपनियों को आज के स्रोत और क्लाइंट बेस बढ़ाने की जरूरत है। एक नई कहावत है कि उतना पेर पसारिए जैसी चादर हो, इस हिसाब से प्रदेश सरकार को इंफ्रा और वेलफेयर एक्टिविटी जरूरी है लेकिन इसमें फ्री बीज को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए अनप्रॉडक्टिव खर्च खत्म किया जाना चाहिए इवेंट मैनेजमेंट और उत्सव मनाने पर ज्यादा खर्च किया जाता है इसी तरह अन्य ऐसे कार्य जिसे सरकार को कोई फायदा नहीं हो रहा उससे बचना चाहिए।
