इस वर्ष 29 जून से 23 नवंबर तक चातुर्मास है इस माह में शरीर को शुद्ध करने के लिए कुछ नियम बताए जाते हैं हल्का खाएं उपवास करें और दिन में सोने से बचें मानसून में मानव शरीर के बाद का और पित्त को कार्यों को बिगाड़ देता है जिससे कई विकार और संक्रमण की आशंका हो जाती है विशेष सावधानी बरतनी होती है इस वर्ष अधिक मास की वजह से यह अवधि 5 मार्च की है।

1. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चातुर्मास में व्रत पूजन हवन और ध्यान एवं योग के लिए कहा जाता है यह सभी चीजें हमारी सेहत से जुड़ी होती है उपवास जिसे आयुर्वेद में लंदन कहते हैं यह पाचन ठीक रखता है।

2. बारिश के चलते भूजल दूषित हो जाता है इससे जल जनित बीमारियां जैसे हैजा ,टाइफाइड ,पाचन संबंधी दूसरों की आशंका होती है।

3. मानसून में पेट की अग्नि बंद होने लगती है इससे शरीर में पित्त और कफ दोष बढ़ने लगता है इसलिए अपच की परेशानी अधिक होती है।

4. बरसात में कीट और मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है इस मौसम में मच्छर जनित रोग जैसे डेंगू ,चिकनगुनिया ,मलेरिया आदि होने की आशंका है उसके वकीलों और संगत से चलते तो अच्छा रोग भी हो सकते हैं।

4 महीने में कब क्या खाएं:

इन 4 महीनों में कुछ खाद्य पदार्थों के परहेज की बात की जाती है हरी पत्तेदार सब्जियां भाद्रपद में दही आश्विन में दूध कार्तिक में दाने खाने से बचें हरी पत्तेदार सब्जियों में जीवाणुओं से संक्रमित होने का खतरा रहता है दही केंद्रित खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया या ज्यादा होते हैं पाचन बिगड़ सकता है केंद्रित भूल से बने इडली ,डोसा, ढोकला आदि से भी परहेज करना चाहिए।

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