भारत के इसरो का सूर्य मिशन सूर्ययान आदित्य L 1अपने सही मार्ग पर अग्रसर है। वहीं 5 सितंबर को आदित्य ने अपनी कक्षा एक बार फिर बदल ली है। इसरो ने थ्रस्टर फायर करके एक बार फिर आदित्य L1 की कक्षा को बढ़ा दिया है। यह इसी तरह 16 दिनों तक पृथ्वी के चक्कर लगाता रहेगा। उसके बाद यह सूर्य की ओर बढ़ेगा और लैंग्रेज पॉइंट L1 में पहुंच जाएगा। वहां पर यह सूर्य का अध्ययन करेगा।

बता दे की आदित्य L1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला भारतीय अंतरिक्ष आधारित मिशन होगा। अंतरिक्ष यान को सूर्य पृथ्वी प्रणाली के लैंग्रेज़ पॉइंट 1 के चारों ओर एक प्रभाव मंडल कक्षा में रखा जाएगा। जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित है। L1 बिंदु के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में रखे गए उपग्रहों को बिना किसी ग्रहण के सूर्य को लगातार देखने का प्रमुख लाभ मिलेगा। क्योंकि इस बिंदु पर सूर्य ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता है।

इससे वास्तविक समय में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके प्रभाव को देखने का अधिक लाभ मिलेगा। अंतरिक्ष यान विद्युत चुंबकीय कण और चुंबक या क्षेत्र डाइटेक्टरो का उपयोग करके प्रकाश मंडल को क्रोमोस्फीयर और सूर्य की सबसे बाहरी परतों (कोरोना) का निरीक्षण परीक्षण करने के लिए साथ पेलोड लेकर गया है। विशेष सुविधाजनक बिंदु L1 का उपयोग करते हुए ऐसा करेगा।

आदित्य एल्बम मिशन के प्रमुख विज्ञानी उद्देश्य यह है :

*सौर ऊपरी वायुमंडलीय गतिशीलता का अध्ययन करना।*क्रोमोस्फीयर और कोरोना हीटिंग का अध्ययन करना।

*आंशिक रूप से आयानेत प्लाज्मा की भौतिकी , कोरोनिकल द्रव्यमान इंजेक्शन की शुरुआत का अध्ययन।

*सूर्य से कड़ गतिशीलता के अध्ययन के लिए डाटा प्रदान करने वाले इन सीटू कण और प्लाज्मा वातावरण का निरीक्षण करना।

*सूर्य कोरोना का भौतिक और इसका तापमान तंत्र।

*कोरोना और कोरोना लूप प्लाज्मा का निदान, तापमान वेग और घनत्व।

* कई परतों पर होने वाली प्रक्रियाओं के अनुक्रम की पहचान करना।

* सौर कोरोना में चुंबकीय क्षेत्र, टोपोलॉजी और चुंबकीय क्षेत्र मापन अंतरिक्ष मौसम के लिए ड्राइवर।

बता दें कि आदित्य के उपकरणों को सौर्य वातावरण मुख्य रूप से क्रोमोस्फीयर और कोरोना का निरीक्षण करने के लिए ही बनाया गया है। इन सीटू उपकरण L1 पर स्थानीय वातावरण का निरीक्षण करेंगे। यान पर कुल 7 पेलोड है जिनमें से चार सूर्य की रिमोट सेंसिंग करते हैं और तीन इन सीटू अवलोकन करते हैं।

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